नरसिंहपुर की ऐतिहासिक धरोहर को मिली डिजिटल पहचान, सदियों पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल पर संरक्षित
संत देवादासजी महाराज की सधुकड़ी बोली में रचित प्राचीन पांडुलिपि का हुआ डिजिटलीकरण, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की दिशा में जिले की बड़ी उपलब्धि
नरसिंहपुर / पुलिस दर्पण
नरसिंहपुर जिले ने अपनी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिले में सुरक्षित एक दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपि का सफलतापूर्वक डिजिटलीकरण कर भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इस पहल से जिले की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर अब डिजिटल रूप में संरक्षित हो गई है, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक विरासत से परिचित हो सकेंगी।
यह महत्वपूर्ण कार्य कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह के निर्देशन में, डाइट के प्राचार्य श्री राजीव श्रीवास्तव के मार्गदर्शन तथा जनपद पंचायत चीचली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक गुप्ता के समन्वित प्रयासों से संपन्न हुआ।
जानकारी के अनुसार, चीचली-सालीचौका क्षेत्र के समीप स्थित ग्राम मेरागांव में संत श्री देवादासजी महाराज द्वारा सधुकड़ी बोली में रचित यह दुर्लभ पांडुलिपि लंबे समय से संरक्षित थी। अब इसे ज्ञान भारतम् पोर्टल पर अपलोड कर डिजिटल रूप से सुरक्षित कर लिया गया है।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा देशभर में ज्ञात एवं अज्ञात स्थानों पर सुरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं डिजिटल दस्तावेजीकरण के उद्देश्य से ‘ज्ञान भारतम्’ अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत ऐतिहासिक महत्व की दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण कर उन्हें शोध, अध्ययन तथा भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित किया जा रहा है।
नरसिंहपुर जिले की यह उपलब्धि न केवल स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम है, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत मानी जा रही है। यह पहल भारतीय ज्ञान परंपरा, इतिहास और संस्कृति को आधुनिक तकनीक के माध्यम से वैश्विक स्तर पर संरक्षित एवं सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है।

