सर्पदंश से हुई मौत का होगा ‘डेथ ऑडिट’, झाड़-फूंक करने वालों पर कसेगा शिकंजा!

​सागर / पुलिस दर्पण
कलेक्टर प्रतिभा पाल का बड़ा एक्शन: जिले में सर्पदंश (सांप काटने) के मामलों में अंधविश्वास के कारण होने वाली मौतों को रोकने के लिए प्रशासन ने अब बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों को एक सख्त और ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। अब जिले में सर्पदंश से होने वाली हर एक मौत का अनिवार्य रूप से ‘डेथ ऑडिट’ किया जाएगा, ताकि लापरवाही और अंधविश्वास की कड़ियों को तोड़ा जा सके।
मौत की होगी ‘बैक ट्रैक’ जांच: क्यों हुई अस्पताल पहुंचने में देरी?
​कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सर्पदंश से हुई मौतों के कारणों की गहराई से ‘बैक ट्रैक’ जांच की जाए। इस ऑडिट में मुख्य रूप से इन बिंदुओं का गहन विश्लेषण होगा:
​मरीज को सांप काटने के बाद अस्पताल पहुंचने में देरी क्यों हुई?
​क्या मरीज को समय पर सही इलाज मिला?
​क्या अस्पताल पहुंचने से पहले मरीज को झाड़-फूंक के चक्कर में फंसाया गया था?
​तांत्रिकों और झाड़-फूंक करने वालों पर होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
​ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में तंत्र-मंत्र, झाड़-फूंक या जहर उतारने का खोखला दावा करने वाले अब प्रशासन के रडार पर हैं। कलेक्टर ने अधिकारियों को ऐसे भ्रांति फैलाने वाले लोगों की पहचान कर तत्काल बैठक आयोजित करने और उन पर सख्त दबिश (कार्रवाई) देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया है कि समाज में अंधविश्वास फैलाकर मासूमों की जान जोखिम में डालने वालों को कतई बख्शा नहीं जाएगा।
“अस्पतालों में एंटीवेनम की कमी बर्दाश्त नहीं”
कलेक्टर ने जिले के सभी शासकीय अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में करेत, कोबरा, रसेल और वाइपर जैसे बेहद जहरीले सांपों के काटने पर दिए जाने वाले एंटीवेनम इंजेक्शन की पर्याप्त और चौबीस घंटे उपलब्धता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी मरीज की जान इलाज के अभाव में न जाए।
​प्रशासन की जनता से अपील: झाड़-फूंक नहीं, अस्पताल चुनें
​ प्रशासन ने आम जनता से बेहद संवेदनशील अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में कीमती समय को झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों में बर्बाद न करें। सांप काटने पर मरीज को बिना वक्त गंवाए तुरंत नजदीकी शासकीय अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचें, क्योंकि समय पर मिला एंटीवेनम ही मरीज को जीवनदान दे सकता है।
​ यह भी पढ़ें: अंधविश्वास के खिलाफ सागर प्रशासन की इस मुहिम से अब ग्रामीण इलाकों में जागरूकता बढ़ने और झाड़-फूंक के नाम पर होने वाली मौतों पर लगाम लगने की उम्मीद है।

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