मंदसौर: खेत में चल रही थी ‘मौत की फैक्ट्री’! मंदसौर पुलिस का बड़ा एक्शन, करोड़ों की MD ड्रग्स और केमिकल बरामद, 2 गिरफ्तार।
मंदसौर / पुलिस दर्पण
मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने के संकल्प के साथ शुरू हुए “ड्रग फ्री मध्यप्रदेश” अभियान के तहत मंदसौर की नई आबादी पुलिस को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने ग्राम बाजखेड़ी में एक खेत के भीतर चल रही अवैध एमडी (सिंथेटिक) ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री का सनसनीखेज भंडाफोड़ किया है।
पुलिस ने मौके से करोड़ों रुपये मूल्य की 13 किलो से ज्यादा तैयार एमडी ड्रग और भारी मात्रा में केमिकल जब्त किया है। डिजिटल जगत में यह खबर आग की तरह फैल गई है क्योंकि मंदसौर में इस तरह की हाईटेक ड्रग फैक्ट्री का मिलना पुलिस के लिए एक बड़ी आंखें खोलने वाली कामयाबी है।
क्या-क्या मिला मौत की इस फैक्ट्री से?
एसपी विनोद कुमार मीना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरे ऑपरेशन का लाइव ब्योरा दिया। मुखबिर की सटीक सूचना पर जब नई आबादी पुलिस ने बाजखेड़ी के उस खेत पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए।
जब्त किए गए सामान की सूची:
तैयार एमडी (सिंथेटिक) ड्रग: 13 किलो 850 ग्राम
कच्चा माल (रासायनिक पदार्थ): 9 किलो 109 ग्राम केमिकल
हाईटेक मशीनें: सेंट्रीफ्यूगल मशीन (ड्रग्स को प्रोसेस करने वाली), इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटा, इंडक्शन और भारी मात्रा में ड्रम-बाल्टियां।
सदाकत और आरीफ दबोचे गए, ताहिर की तलाश में नाकेबंदी
पुलिस ने इस काले कारोबार को अंजाम दे रहे दो मुख्य आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया है: सदाकत खान (उम्र 41 वर्ष) आरीफ अजमेरी (उम्र 33 वर्ष)
बड़ी खबर: पुलिस की भनक लगते ही इस रैकेट का एक और शातिर आरोपी ताहिर अजमेरी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। पुलिस ने पूरे जिले में नाकेबंदी कर दी है और ताहिर की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।
अब खुलेगा ड्रग्स सिंडिकेट का असली राज!
थाना नई आबादी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। न्यूज़ पोर्टल्स को मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस अब आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेगी।
पुलिस की जांच अब इन तीन बड़े सवालों पर टिकी है:
यह केमिकल मंदसौर तक कहाँ से और कैसे पहुंच रहा था?
यहाँ तैयार होने वाली एमडी ड्रग्स की सप्लाई किन बड़े शहरों और पब-क्लबों में होनी थी?
इस इंटरनेशनल या अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का असली ‘आका’ कौन है?

