रतलाम का वो खौफनाक ‘साइको किलर’: पटाखों के शोर में किया था पूरे परिवार का अंत; अब 3 जिंदा बचे गुनहगारों को ‘तिहरा आजीवन कारावास’!
विशेष संवाददाता, रतलाम
21 जून, 2026
रतलाम: मध्य प्रदेश के रतलाम को दहला देने वाले चर्चित ‘राजीव नगर तिहरे हत्याकांड’ में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की कोर्ट ने मामले के तीन जीवित आरोपियों—अनुराग, लाला और गोलू को दोषी करार देते हुए तिहरा आजीवन कारावास (Triple Life Imprisonment) और भारी अर्थदंड की सजा सुनाई है।
इस खौफनाक कत्लेआम का मुख्य सूत्रधार और ‘साइको किलर’ दिलीप देवल पहले ही पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है। आरोपियों ने महज 20 लाख रुपए की लूट के लिए एक ही परिवार के तीन मासूम लोगों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था।
दिवाली की रात पटाखों के शोर में छिपाई थीं गोलियों की गूंज
यह रूह कंपा देने वाली वारदात 25 नवंबर 2020 (छोटी दीपावली) की रात हुई थी। राजीव नगर में रहने वाले सेलून संचालक गोविंद सोलंकी, उनकी पत्नी शारदा और बेटी दिव्या की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
मास्टरमाइंड दिलीप देवल ने जानबूझकर छोटी दीपावली का दिन चुना था ताकि जब वो गोलियां चलाए, तो उसकी आवाज पटाखों के शोर में दब जाए और पड़ोसियों को कोई शक न हो।
शारदा को पहली गोली: रात करीब 7:30 बजे आरोपी सोलंकी के घर पहुंचे। गोलू बाहर पहरा दे रहा था, जबकि दिलीप, अनुराग और लाला अंदर घुसे। टीवी देख रही शारदा के सिर में दिलीप ने पहली गोली मारी।
बेटी दिव्या की मौत: आवाज सुनकर कमरे से बाहर भागी बेटी दिव्या कुछ समझ पाती, उससे पहले ही उसे भी गोली मार दी गई।
घर के मुखिया का कत्ल: इसके बाद आरोपियों ने घर खंगालना शुरू किया। रात करीब 9 बजे जब गोविंद सोलंकी अपने सैलून से लौटे, तो दहलीज पर कदम रखते ही दिलीप ने उन्हें भी मौत की नींद सुला दिया।
अगली सुबह घर में रहने वाली एक नर्स जब स्कूटी की चाबी लेने ऊपर पहुंची, तब इस वीभत्स हत्याकांड का खुलासा हुआ।
200 CCTV कैमरे और 20 हजार मोबाइल नंबरों ने खोला राज
इस तिहरे हत्याकांड से पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। पुलिस पर भारी दबाव था। जांच टीम ने तकनीकी स्तर पर पड़ताल शुरू की और वारदात की रात इलाके में एक्टिव करीब 20 हजार मोबाइल नंबरों का डेटा खंगाला।
पुलिस ने जब आसपास के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज देखे, तो रात 9 से 10 बजे के बीच दो संदिग्ध मृतका की गायब स्कूटी पर भागते दिखे। करीब 200 कैमरों को ट्रैक करने के बाद पुलिस एक मंदिर के पीछे पहुँची, जहाँ स्कूटी लावारिस मिली। आरोपी रास्ते में कपड़े बदल चुके थे, लेकिन बारीकी से जांच करने पर कैमरे में मुख्य आरोपी दिलीप देवल का चेहरा साफ हो गया।
कोरोना काल में जीता था विश्वास
लॉकडाउन के दौरान गोविंदराम अपने घर से ही सैलून चलाते थे, जहाँ दिलीप का आना-जाना शुरू हुआ। उसने परिवार का भरोसा जीता। इसी दौरान उसे भनक लगी कि गोविंदराम ने एक जमीन बेची है और उनके पास 20 लाख रुपये आने वाले हैं। इसी रकम को लूटने के लिए उसने यह खूनी साजिश रची।
जब पुलिस के सामने आया साइको किलर: खौफनाक एनकाउंटर
3 दिसंबर 2020 को पुलिस को सूचना मिली कि दिलीप खाचरोद रोड स्थित मिड टाउन के एक किराए के मकान में छिपा है। पुलिस ने जब घेराबंदी की, तो आत्मसमर्पण करने के बजाय दिलीप ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।
पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें ‘साइको किलर’ दिलीप देवल ढेर हो गया। इस मुठभेड़ में दो सब-इंस्पेक्टर और तीन आरक्षकों सहित 5 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। दिलीप पर मध्य प्रदेश और गुजरात में हत्या के 6 मामले दर्ज थे।
डॉ. प्रेमकुंवर सिसोदिया हत्याकांड का भी था आरोपी
दिलीप सिर्फ इसी हत्या में शामिल नहीं था, बल्कि वह कस्तूरबा नगर में 18 जून, 2020 को हुई डॉ. प्रेमकुंवर सिसोदिया की अंधी हत्या का भी मास्टरमाइंड था। वहाँ भी उसने 70 लाख रुपये में स्कूल बेचने वाली विशाला सोलंकी नाम की महिला से दोस्ती कर डॉक्टर के घर की रेकी की थी और लाखों की डकैती डालकर डॉक्टर की हत्या कर दी थी, जिसे पुलिस तब सुलझा नहीं पाई थी।
DNA रिपोर्ट और अभियोजन की अचूक पैरवी
बचे हुए तीन आरोपियों को फांसी के फंदे और तिहरे आजीवन कारावास तक पहुँचाने में साइंटिफिक एविडेंस (वैज्ञानिक साक्ष्य) सबसे बड़ा हथियार बने। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने:
111 भौतिक वस्तुएं (Physical Evidence) पेश कीं।
210 दस्तावेजी सबूत कोर्ट के सामने रखे।
33 चश्मदीद और गवाहों के बयान दर्ज कराए।
घटनास्थल से मिले सबूतों और आरोपियों की डीएनए (DNA) रिपोर्ट ने कोर्ट में यह अकाट्य रूप से साबित कर दिया कि कत्ल की रात ये तीनों हत्यारे दिलीप के साथ उस घर में मौजूद थे। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद रतलाम की जनता ने न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन की इस मुस्तैदी की सराहना की है।
‘राजीव नगर तिहरे हत्याकांड’ में अदालत का ऐतिहासिक फैसला

