कलेक्टर ने आयुष्मान कार्ड की धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी

झाबुआ में कलेक्टर का कड़ा रुख: आयुष्मान कार्ड की धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी, 70 पार के बुजुर्गों के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम
बड़ी समीक्षा: सीएम हेल्पलाइन, शिक्षा, पर्यटन और जनकल्याण अभियान की प्रगति जांचने खुद मैदान में उतरे कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट।

झाबुआ। पुलिस दर्पण संवाददाता

शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं को समय-सीमा में पूरा करने और आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए झाबुआ जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। सोमवार को कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित समयावधि पत्रों (टीएल) एवं अंतर्विभागीय समन्वय बैठक में कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने कड़ा रुख अपनाते हुए विभिन्न विभागों के लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनहित के कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या लेती-लतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारी समयबद्ध कार्य संस्कृति को अपनी आदत बना लें।
इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री जितेन्द्रसिंह चौहान, अपर कलेक्टर श्री सी.एस. सोलंकी, संयुक्त कलेक्टर श्री विजय कुमार मंडलोई सहित जिले के सभी एसडीएम और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
70 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड के लिए 15 दिन की डेडलाइन
बैठक में आयुष्मान भारत योजना की समीक्षा के दौरान जब यह सामने आया कि जिले में 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रगति मात्र 39.1 प्रतिशत ही है, तो कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने इस पर गहरा असंतोष व्यक्त किया।
कलेक्टर ने संबंधित विभागों को कड़ी हिदायत देते हुए कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जाए। आगामी 15 दिनों के भीतर इस ग्राफ को 39.1% से बढ़ाकर सीधे 80 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए, ताकि बुजुर्गों को समय पर स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिल सके।
गैर-हाजिर शिक्षकों पर गिरेगी गाज, 15 दिन में होगी अतिथियों की नियुक्ति
शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने पर विशेष जोर दिया।
औचक निरीक्षण: कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे लगातार स्कूलों का औचक निरीक्षण करें। यदि कोई शिक्षक बिना पूर्व सूचना के गायब पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तत्काल नियमानुसार सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
अतिथि शिक्षक: शासन से हरी झंडी मिलने के बाद अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को हर हाल में 15 दिनों के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
जनकल्याण अभियान: झाबुआ जिला प्रदेश में छठे स्थान पर
बैठक में जिला प्रशासन की एक बड़ी कामयाबी भी साझा की गई। जनकल्याण अभियान के तहत झाबुआ जिले में रिकॉर्ड 1 लाख 19 हजार 409 आवेदन प्राप्त हुए, जिसके दम पर झाबुआ ने पूरे मध्यप्रदेश में छठा स्थान हासिल किया है।
प्राप्त आवेदनों में से 1 लाख 15 हजार 108 आवेदन ग्रामीण क्षेत्रों से और 4 हजार 301 आवेदन शहरी क्षेत्रों से आए थे, जिनमें से 1 लाख 16 हजार 474 आवेदनों का रिकॉर्ड समय में निराकरण भी किया जा चुका है।
सीएम हेल्पलाइन की कछुआ चाल पर नाराजगी
एक तरफ जहां जनकल्याण आवेदनों के निराकरण में जिला आगे रहा, वहीं अभियान के दौरान मिली सीएम हेल्पलाइन की 3,017 शिकायतों में से केवल 653 के निराकरण पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने विशेष रूप से 100 दिनों से अधिक समय से लंबित शिकायतों को टेबल पर रखकर विभागवार समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि खानापूर्ति करने के बजाय नागरिकों की समस्याओं का गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिपूर्ण समाधान किया जाए।
पर्यटन और जनजातीय विकास को लेकर अन्य बड़े निर्णय:
हाथीपावा और देवझिरी का होगा कायाकल्प: झाबुआ के प्रमुख प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों— हाथीपावा पहाड़ी एवं देवझिरी को बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए एक संयुक्त समिति गठित कर विस्तृत कार्ययोजना (ब्लूप्रिंट) तैयार करने के आदेश दिए गए हैं।
धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान: जनजातीय क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की गति तेज करने के निर्देश दिए गए ताकि योजनाओं का सीधा लाभ आदिवासी अंचलों के पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे।
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र का डिजिटाइजेशन: आम जनता को सुगम सेवाएं देने के लिए सभी रिकॉर्ड डिजिटल किए जा रहे हैं। इसके लिए जल्द ही संबंधित पंजीयन अधिकारियों का एक विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा।
जल गंगा संवर्धन अभियान: जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन के कार्यों को समय-सीमा में पूरा करने के साथ-साथ इसमें अधिक से अधिक जनभागीदारी जोड़ने की बात कही गई।

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