दो दशक बाद रादुविवि में ऐतिहासिक क्षण: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया दीक्षांत समारोह का शंखनाद।
पारंपरिक केसरी साफे और मालवी परिधान में सजे दिखे मुख्यमंत्री, राज्यपाल और विवि के प्रोफेसर; औपनिवेशिक गाउन संस्कृति से मिली मुक्ति
240 स्वर्ण पदकों के साथ मेधावी बेटियों ने लहराया सफलता का परचम, राष्ट्रपति बोलीं— “यह सशक्त भारत की तस्वीर”
जबलपुर/संवाददाता पुलिस दर्पण
जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुविवि) का ’36वां दीक्षांत समारोह’ बेहद भव्य, पारंपरिक और गरिमामयी माहौल में संपन्न हुआ। लगभग 20 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद देश की राष्ट्रप्रमुख के रूप में माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने विश्वविद्यालय प्रांगण में कदम रखा।
समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर की गई। इस अवसर पर गरिमामयी उपस्थिति के रूप में मध्य प्रदेश के राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार मंच पर उपस्थित रहे।
ब्रिटिश कालीन गाउन संस्कृति को पूरी तरह छोड़ चुके इस दीक्षांत समारोह में भारतीय संस्कृति की अनूठी छटा बिखरी हुई थी। मंच पर उपस्थित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, कुलपति प्रोफेसर राजेश कुमार वर्मा सहित विश्वविद्यालय के तमाम वरिष्ठ प्रोफेसर पारंपरिक केसरी रंग के साफे (पगड़ी) और सुनहरे उत्तरीय (दुपट्टे) से सुसज्जित थे। अतिथियों और प्राध्यापकों का यह पारंपरिक साफा बांधने का अंदाज पूरे परिसर में गौरव और राष्ट्रिय अस्मिता का प्रतीक बना रहा।
आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों और संस्कृति को संजोए रखें युवा: राष्ट्रपति
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि शिक्षण संस्थानों की यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ युवाओं में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भाषाओं के प्रति गौरव का भाव पैदा करें। उन्होंने वीरांगना रानी दुर्गावती के त्याग और शौर्य को याद करते हुए उन्हें महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी प्रेरणा बताया। राष्ट्रपति ने इस बात पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि स्वर्ण पदक विजेताओं में छात्राओं की संख्या सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं, जो एक संतुलित और सशक्त राष्ट्र निर्माण का संकेत है।
मुख्यमंत्री और अतिथियों ने थपथपाई मेधावियों की पीठ
कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों और मेधावियों ने पारंपरिक परिधानों में दीक्षांत शोभायात्रा (एकेडमिक प्रोसेशन) निकालकर यह साबित कर दिया है कि हमारा युवा वर्ग अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ा हुआ है।
विशेष इनसेट: डिग्रियों औरपदकों का आधिकारिक आंकड़ा
20 साल बाद राष्ट्रप्रमुख का आगमन: विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद देश के किसी राष्ट्रपति ने रादुविवि के दीक्षांत समारोह में शिरकत की है, जिससे छात्र-छात्राओं में भारी उत्साह देखा गया।
बेटियों का दबदबा: इस ऐतिहासिक अवसर पर कुल 141 मेधावी विद्यार्थियों को 240 स्वर्ण पदक (Gold Medals) वितरित किए गए। पदकों की सूची में छात्राओं ने एकतरफा बाजी मारी।
उच्च शिक्षा का बड़ा मंच: समारोह के दौरान मेधावियों को पदक सौंपने के साथ ही 182 शोधार्थियों को पी.एचडी. (Ph.D.), 3 को डी.लिट (D.Litt.) और 1 शोधार्थी को डी.एससी (D.Sc.) की उपाधियां प्रदान की गईं। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान पाकर कई विद्यार्थी और उनके अभिभावक भावुक हो उठे।

