बहुत आसान है साहब…
किसी पत्रकार को कोस देना, उसकी नीयत पर सवाल उठाना,
पर बहुत मुश्किल है खुद पत्रकार होना।
पत्रकार सिर्फ बैग, डायरी, पेन और माइक के लिए नहीं जीता,
वो जीता है अपने जुनून और जिम्मेदारी के लिए।
उसके पास न कोई निश्चित समय है, न सुकून की नींद।
दुनिया को बदलने की उम्मीद लिए, वो हर दिन सच्चाई की तलाश में निकल पड़ता है।
वो जानता है कि दुनिया उसकी मुट्ठी में नहीं,
पर उसकी कलम में वो ताकत है जो सच को दुनिया के सामने ला सकती है।
वो रोज़ लड़ता है खुद से –
अपनी थकान से, अपनों की उम्मीदों से, समाज की उपेक्षा से।
कभी भूखे पेट, कभी बिना विश्राम,
पर चेहरे पर सिर्फ एक ही संकल्प – सच को दिखाना है।
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पत्रकार वो है जो दीन-दुखियों, शोषितों, और पीड़ितों की आवाज़ बनता है। जिसकी कलम गरीबों की न्याय की लड़ाई लड़ती है।
जो सिस्टम के खिलाफ खड़ा होता है — निडर, बेख़ौफ और निष्पक्ष।
🙏 ऐसे सभी कलमकारों को कोटि-कोटि बधाई और शुभकामनाएं —
जो अपने जोशो-जुनून से पत्रकारिता को सिर्फ पेशा नहीं, एक पवित्र सेवा बना चुके हैं।
📌 आइए, ऐसे योद्धाओं का सम्मान करें जो कैमरे और कलम के पीछे रहकर समाज की असली तस्वीर दिखाते हैं।

