पंचेड़ फंटे पर मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई, बिना नंबर की सफेद क्रेटा से बोरे में मिले नोटों के बंडल
थाने में मशीन से गिनाए गए नोट, मीजान से पुलिस ने मांगे नकदी से जुड़े दस्तावेज; आयकर विभाग को भी दी गई सूचना
पुलिस के अनुसार रकम से जुड़े दस्तावेज तत्काल प्रस्तुत नहीं हो सके, सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी राशि की वैधता
नामली/ रतलाम। पुलिस दर्पण
नामली/ रतलाम। नामली थाना क्षेत्र में शनिवार शाम बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पुलिस ने मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए बिना नंबर की सफेद क्रेटा कार से ₹73 लाख 72 हजार 500 रुपये नकद बरामद किए हैं। कार की तलाशी के दौरान पिछली सीट पर रखे बोरे में नोटों के बंडल मिलने की बात सामने आई है। वाहन और नकदी को जब्त कर संबंधित युवक को नामली थाने लाया गया, जहां पुलिस की मौजूदगी में नोटों की गिनती मशीन से कराई गई।
मामले में युवक की पहचान मीजान पुत्र रईस खां उम्र 30 उमट पालिया के रूप हुई। पूछताछ में मीजान ने पुलिस को रकम जमीन बेचने से प्राप्त होने की बात बताई। उसका कहना है कि वह रकम लेकर रतलाम में सोना खरीदने गया था, लेकिन खरीदारी नहीं हो सकी और वह नकदी लेकर वापस लौट रहा था। दूसरी ओर पुलिस ने नकदी से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं और उनका सत्यापन किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार शनिवार देर रात तक युवक रकम के संबंध में कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया था। बार बार बयांन बदल रहा था
मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी
जानकारी के अनुसार पुलिस को मुखबिर तंत्र से मादक पदार्थों और अन्य संदिग्ध गतिविधियों से संबंधित सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने फोरलेन मार्ग पर निगरानी बढ़ाई और वाहनों की जांच शुरू की।इस दौरान बिना नंबर की सफेद क्रेटा कार पुलिस की नजर में आई। वाहन को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान कार की पिछली सीट पर रखा बोरा मिला। पुलिस ने जब बोरे की जांच की तो उसमें नोटों की गड्डियां रखी हुई मिलीं। नकदी की मात्रा अधिक होने के कारण पुलिस ने वाहन सहित युवक को नामली थाने लाकर आगे की कार्रवाई शुरू की।
₹73 लाख 72 हजार 500 की निकली नकदी
थाने में बरामद नोटों की गिनती की गई।नोट गिनने वाली मशीन के माध्यम से रकम की गणना की गई और कुल राशि ₹73,72,500 सामने आई। रकम में 100, 200 और 500 रुपये के नोट शामिल थे। इतनी बड़ी संख्या में नोट होने के कारण गिनती की प्रक्रिया में काफी समय लगा।पुलिस की निगरानी में संबंधित युवक से भी मशीन के माध्यम से नोटों की गिनती कराई गई। नोटों की गिनती थाना प्रभारी अमित कोरी के कक्ष में की गई जिसमें एडीशनल एसपी राकेश पंद्रो डीएसपी एसडीओपी किशोर पाटनवाला उपस्थित थे थाना प्रभारी द्वारा दो सरकारी गवाह बनाएं गए एक बंटी डाबी और दूसरा सरकारी गवाह राजेश जाट को गवाह बनाया गया । नोटों गिनती की प्रक्रिया में सरकारी गवाह भी मौजूद रहे।
पुलिस ने मांगे नकदी से जुड़े दस्तावेज
नकदी बरामद होने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल रकम के स्रोत को लेकर है। पुलिस ने युवक से नकदी से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। युवक द्वारा जमीन बेचकर रकम मिलने की बात कही गई है। ऐसे में पुलिस जमीन की बिक्री से जुड़े दस्तावेज, रजिस्ट्री, भुगतान का विवरण और अन्य संबंधित कागजात का सत्यापन कर सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार शनिवार देर रात तक युवक कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया था। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि रकम अवैध है। रकम का वास्तविक स्रोत दस्तावेजों के परीक्षण और संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
युवक ने पहले जमीन बेचने की बताई बात
पूछताछ के दौरान मीजान ने पुलिस को बताया कि उसने जमीन बेची है और उसी से यह रकम प्राप्त हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में उसने जमीन की बिक्री और रजिस्ट्री का उल्लेख किया, लेकिन संबंधित दस्तावेज तत्काल प्रस्तुत नहीं कर पाने की बात सामने आई।इसके बाद युवक से जमीन बिक्री से संबंधित और जानकारी मांगी गई। जमीन किसे बेची गई, कितनी राशि में बेची गई, भुगतान किस प्रकार हुआ और बिक्री से प्राप्त रकम इतनी बड़ी मात्रा में नकद उसके पास कैसे आई—इन बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।
बाद में स्टांप लिखवाने की बात भी सामने आई
मिली जानकारी के अनुसार पूछताछ के दौरान युवक ने जमीन बेचने का स्टांप लिखवाने की बात भी कही, लेकिन स्टांप से संबंधित स्पष्ट जानकारी अथवा दस्तावेज तत्काल प्रस्तुत नहीं किए जा सके।इसके बाद पुलिस ने रकम के स्रोत को लेकर और पूछताछ की। अब संबंधित जमीन, स्टांप, रजिस्ट्री और भुगतान से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक द्वारा बताया गया जमीन बिक्री का पक्ष दस्तावेजों से कितना मेल खाता है।
पिता के माध्यम से जमीन खरीद-बिक्री की बात
पूछताछ में मीजान ने अपने पिता सादिक खान के माध्यम से भी जमीन खरीदने-बेचने से संबंधित लेन-देन होने की जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है। बताया गया कि कुछ दिन पहले जमीन खरीदने और उसके बदले रकम देने से संबंधित लेन-देन हुआ था, लेकिन संबंधित दस्तावेज तत्काल उपलब्ध नहीं हो सके। इसके बाद युवक द्वारा सोना खरीदने के लिए रतलाम जाने की बात कही गई। इन सभी दावों का सत्यापन पुलिस और संबंधित विभागों द्वारा किया जाना बाकी है।
सोना खरीदने रतलाम जाने का दावा
मीजान के अनुसार वह जमीन बिक्री से प्राप्त रकम लेकर रतलाम में सोना खरीदने गया था। हालांकि वहां पहुंचने के बाद खरीदारी नहीं हो सकी।युवक का कहना है कि सराफा बाजार में भाव अथवा लेन-देन की स्थिति अनुकूल नहीं होने के कारण सोना खरीदे बिना ही वह वापस लौट रहा था। इसी दौरान पुलिस ने उसे रोक लिया। पुलिस अब इस दावे की भी पुष्टि कर सकती है कि युवक वास्तव में सोना खरीदने के लिए किसी सराफा प्रतिष्ठान में गया था या नहीं। इसके लिए संबंधित व्यापारी, मोबाइल पर हुई बातचीत अथवा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा सकती है।
अधिवक्ता ने कहा—रकम बेनामी धन नहीं
मामले की जानकारी मिलने के बाद मीजान के चाचा इफ्तार खान और जावरा के अधिवक्ता महेंद्र सिंह सिसोदिया नामली थाने पहुंचे। अधिवक्ता ने युवक के पक्ष में कहा कि मीजान ने कुछ दिन पहले प्रॉपर्टी बेची थी और उसी से रकम प्राप्त हुई है। उनका कहना है कि परिवार के पास जमीन की खरीद-बिक्री से संबंधित हिसाब-किताब है तथा परिवार आयकर का भुगतान भी करता है। अधिवक्ता के अनुसार यदि जमीन बेचने से संबंधित दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड आयकर विभाग के समक्ष प्रस्तुत कर दिए जाते हैं तो रकम के स्रोत की पुष्टि हो जाएगी। उन्होंने रकम को बेनामी धन नहीं होने का दावा किया है।हालांकि यह अधिवक्ता और परिवार की ओर से प्रस्तुत पक्ष है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर होना बाकी है।
पुलिस ने आयकर विभाग को दी जानकारी
इतनी बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद मामले की जानकारी इनकम टैक्स विभाग को दिए जाने की बात सामने आई है। अब आयकर विभाग के स्तर पर भी यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि बरामद रकम का संबंध युवक अथवा उसके परिवार की घोषित आय और जमीन की बिक्री से है या नहीं। नकदी से जुड़े दस्तावेज पुलिस अथवा संबंधित विभाग द्वारा मांगे गए हैं और उनके सत्यापन की प्रक्रिया आगे चल सकती है। यदि जमीन बिक्री की राशि का दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध होता है तो उसके आधार पर रकम के स्रोत की पुष्टि की जा सकेगी। वहीं दस्तावेज और रकम के बीच कोई विसंगति मिलने पर संबंधित विभाग आगे की कार्रवाई कर सकते हैं।
हवाला अथवा बेनामी धन की आशंका की भी जांच
पुलिस के अनुसार युवक रकम से संबंधित कोई स्पष्ट दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया था, जिसके चलते रकम के स्रोत की जांच की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार हवाला अथवा अन्य अवैध स्रोत से रकम आने की आशंका को भी जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा गया है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कर रहे निगरानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में कार्रवाई की गई। एएसपी राकेश पंद्रो सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मामले की निगरानी कर रहे हैं। नामली थाना प्रभारी अमित कोरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने युवक से पूछताछ की। रतलाम ग्रामीण एसडीओपी किशोर पाटनवाला की मौजूदगी में भी कार्रवाई की गई। पुलिस का मुख्य फोकस नकदी के स्रोत और उसके दस्तावेजी आधार को स्पष्ट करने पर है।
बिना नंबर की क्रेटा भी जांच का हिस्सा
मामले में नकदी के साथ जिस वाहन से रकम बरामद होने की बात कही गई है, वह बिना नंबर की सफेद क्रेटा कार बताई गई है। इस कारण वाहन की भी जांच महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिस वाहन के स्वामित्व, खरीद के दस्तावेज, पंजीयन की स्थिति और वाहन का उपयोग कौन कर रहा था, इसकी जानकारी जुटा सकती है। यदि वाहन नया है तो उसके पंजीयन अथवा अस्थायी दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।
कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं
नकदी बरामदगी की खबर सामने आने के बाद अलग-अलग प्रकार की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ चर्चाओं में नकदी की मात्रा को लेकर अलग-अलग आंकड़े बताए गए, जबकि कार्रवाई के स्थान को लेकर भी अलग-अलग दावे किए गए। कुछ अपुष्ट चर्चाओं में ₹2 करोड़ से अधिक की नकदी होने की बात भी कही गई। हालांकि पुलिस अनुसार पुलिस द्वारा बरामद राशि ₹73 लाख 72 हजार 500 रुपये बताई गई है। इसलिए ₹2 करोड़ से अधिक की नकदी संबंधी चर्चा की चर्चाएं बनकर रहें गई।
अब दस्तावेजों से तय होगी रकम की कहानी
पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका दस्तावेजों की होगी। यदि युवक द्वारा जमीन बिक्री से रकम मिलने की बात कही जा रही है तो संबंधित जमीन की रजिस्ट्री, स्टांप, बिक्री मूल्य, भुगतान का माध्यम और संबंधित व्यक्तियों के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।साथ ही यह भी देखा जाएगा कि इतनी बड़ी राशि नकद रूप में युवक के पास क्यों थी और क्या उसका उल्लेख आयकर अथवा अन्य वित्तीय रिकॉर्ड में है। यदि सभी दस्तावेज रकम से मेल खाते हैं तो युवक के दावे को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने अथवा रिकॉर्ड में विसंगति पाए जाने पर जांच का दायरा बढ़ सकता है।
जांच के प्रमुख सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस और संबंधित विभागों के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं—
- ₹73 लाख 72 हजार 500 रुपये का वास्तविक स्रोत क्या है?
- क्या रकम वास्तव में जमीन बिक्री से प्राप्त हुई?
- संबंधित जमीन की रजिस्ट्री कब और किसके नाम हुई?
- जमीन की बिक्री की कुल कीमत कितनी थी?
- भुगतान नकद हुआ या बैंकिंग माध्यम से?
- क्या जमीन बिक्री और बरामद नकदी के बीच सीधा संबंध है?
- रतलाम में सोना खरीदने की बात की पुष्टि होती है या नहीं?
- बिना नंबर की क्रेटा कार किसके नाम है?
- रकम का उल्लेख आयकर रिकॉर्ड में है या नहीं?
- क्या नकदी का किसी अन्य व्यक्ति अथवा लेन-देन से संबंध है?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।
निष्कर्ष : नकदी बरामदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण है उसका स्रोत
नामली में सामने आया यह मामला केवल बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने तक सीमित नहीं है। असली जांच अब इस बात की है कि ₹73.72 लाख की रकम कहां से आई और उसका वैध दस्तावेजी आधार क्या है।
पुलिस के अनुसार रकम बरामद कर ली गई है और जांच जारी है। युवक ने जमीन बिक्री से रकम मिलने तथा रतलाम में सोना खरीदने के लिए जाने की बात कही है। उसके अधिवक्ता ने भी रकम के वैध होने और परिवार के पास संबंधित हिसाब-किताब होने का दावा किया है। दूसरी ओर पुलिस ने नकदी से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं और उनके सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। आयकर विभाग को सूचित किया गया है। ऐसे में फिलहाल न तो युवक के दावे को अंतिम सत्य माना जा सकता है और न ही बरामद रकम को अवैध घोषित किया जा सकता है।
दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड, जमीन की रजिस्ट्री, आयकर विवरण और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही रकम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। बिना नंबर की क्रेटा, बोरे में रखी ₹73.72 लाख की नकदी, जमीन बिक्री का दावा, सोना खरीदने की कहानी और दस्तावेजों का सत्यापन—इन सभी कड़ियों को जोड़ने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभागों की जांच पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

