सावन इतना मनभावन क्यों?
……पण्डित प्रदीप शुक्ल सावन केवल वर्षा का महीना नहीं है। यह भारत की सांस्कृतिक स्मृति में एक ऐसी ऋतु है…
……पण्डित प्रदीप शुक्ल सावन केवल वर्षा का महीना नहीं है। यह भारत की सांस्कृतिक स्मृति में एक ऐसी ऋतु है…
……..पण्डित प्रदीप शुक्ल “राजनीतिक मिथक बनाम विधिक सत्य — संसदीय लोकतंत्र में जवाबदेही और संस्थागत मर्यादा का पुनरावलोकन” भारत के…
…..पण्डित प्रदीप शुक्ल लोकतंत्र केवल संविधान, कानून और न्यायालयों के आदेशों से संचालित नहीं होता। उसका सबसे मजबूत आधार वह…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल भारतीय पंचांग में कुछ ऐसे मास हैं जिनका उल्लेख केवल कालगणना के रूप में नहीं, बल्कि ‘जीवन-दृष्टि’…
……पण्डित प्रदीप शुक्ल लखनऊ से आई यह खबर केवल एक विभागीय पत्र की कहानी नहीं है। यह उस बड़े विमर्श…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल पेपर लीक विरोधी छात्र आंदोलन अब भले ही सड़कों से हट चुका हो, लेकिन उसने भारतीय लोकतंत्र…
……पण्डित प्रदीप शुक्ल जंतर-मंतर की धूप में जब नेहा बोरा मंच पर पहुँचीं, तो शरीर उनकी आवाज़ के आगे झुक…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल भारत का लोकतंत्र केवल मतदान से नहीं, उत्तरदायित्व से चलता है। जब सड़क पर खड़ा छात्र यह…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल लोकतंत्र में पुलिस, न्यायपालिका, मीडिया और नागरिक—ये चारों एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि जवाबदेही की श्रृंखला के…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल “जब छात्र सड़कों पर हों, संसद मौन हो और सत्ता बैरिकेडों के पीछे खड़ी दिखाई दे, तब…