….प्रदीप कुमार नायक
सावधानी बरते जो चाय आप सेहतमद होने के लिए पी रहे हैं l वह स्वीट प्वाजन के रूप में आपकी सेहत बिगाड़ भी सकता हैं l भारतीय घरों में सुबह उठते ही पहले खुराक के तौर पर सबसे अधिक सेवन चाय की ही होती हैं l अगर आपको मालूम चले कि आप जो चाय पी रहे हैं, वो मिलावटी हैं तो यह किसी वज्रपात से कम नहीं होगा l काफ़ी में चिकोरी पाउडर की मिलावट होती हैं l इसके इस्तेमाल से डायरिया और जोड़ों का दर्द होना तय होता हैं l इसी तरह चाय में भी कई तरह की मिलावट हैं l
चाय की राक्षसी माया आजकल सचमुच अरम्परा दिखती हैं l आज योगी, यति, साधु -संत, अमीर -गरीब, विद्वान-मूर्ख, गंवार -शहरी सब चाय के अंध भक्त बन चूके हैं l गाँव -गाँव, देहात -देहात, शहर -बाजार में चाय का खूब प्रचार हैं l दूसरे देशों की बात हम नहीं जानते मगर हमारे देश भारत में जहाँ कभी दूध, दही और अमृत तुल्य मट्ठा की नदियां बहती थी, वहाँ आज काली -कलूठी विष तुल्य चाय का समुद्र थांठे मार रहा हैं l आज देश के गरीब से गरीब और अमीर से अमीर व्यक्ति के घर अतिथियों का स्वागत क्षीर, शिखरिणी तक एवं शरबत की जगह बैड टी का सेवन करना उत्तम समझते हैं l
चाय के अंध भक्त यह दलील पेश करते हैं कि क्या करें, आजकल दूध मंहगा हो गया हैं और शुद्ध दूध का मिलना भी बहुत मुश्किल हो गया हैं l अत:यदि उसकी जगह इस सस्ती चाय का भी प्रयोग न करें तो क्या करें? माना कि दूध महंगा हैं और शुद्ध दूध की कमी महसूस हो रही हैं l इसके एवज़ में चाय सस्ती हैं, तो क्या अमृत की जगह विष को ग्रहण करना बुद्धिमानी का काम हैं l चाय की माया से वशीभूत होकर चाय के भक्त चाय के सेवन से आनन्द, शांति एवं स्फूर्ति की प्राप्ति होना बताते हैं और कहते हैं कि चाय पीने के बाद जो आनन्द, शांति एवं स्फूर्ति की अनुभूति होती हैं, वह क्षणिक और केवल भुलावा देने के लिए ही होती हैं l मगर उसका अन्त और परिणाम विष तुल्य होता हैं l
चाय पीने के बाद जो थकावट दूर होने जैसा मालूम होती हैं, वह उस अवस्था से अधिक ख़तरनाक होती हैं l जो चाय पीने से पहले थकावट की हालत लोगों की रहती हैं l कारण थकावट के समय में जब लोग चाय पीते हैं तो चाय अपने मादक गुण से हमारे सजग मस्तिष्क के ज्ञान तंतुओं पर अपना विषवत प्रभाव डालकर उनकी अनुभव करने वाली शक्तियों को सुला देती हैं l जिससे लोग अपनी थकावट की बात भूलने के लिए बाध्य होते हैं l पर उस अवस्था में हमें यह नहीं समझना चाहिए कि वास्तव में थकावट चली गई हैं l दर असल चाय लोगों के थकावट को दूर नहीं करती, अपितु उस पर पर्दा डाल देती हैं l
वास्तव में चाय विष की खान होने के कारण स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं l चाय के सेवन से शरीर दिन -ब -दिन कमजोर होता चला जाता हैं l कब्ज रहने लगता हैं, शरीर का रंग पीला पड़ जाता हैं, तथा नींद हराम हो जाती हैं, जिससे मस्तिष्क के अनेक रोग आ घेरते हैं l इतना ही नहीं चाय का असर फेफड़ो, दिल के अतड़ियों के लिए भी बहुत हानिकारक हैं, और इसके पीने से भूख का मर जाना तो मामूली बात हैं l
आज दुनियां के सारे चिकित्सक यह मानते हैं कि चाय में शरीर के लिए कोई पोषक तत्व नहीं होता हैं, और इसके सेवन से मन और शरीर पर ख़राब असर पड़ता हैं, फिर भी चाय का सेवन नित्य दिन अंधाधुंध हो रहा हैं l चाय आमतौर पर गर्मा गरम ही पी जाती हैं l जब यह चाय उदर में प्रवेश करती हैं तो चाय द्वारा नाड़ी -मण्डल के विकृत होने पर मस्तिष्क विकृत हो जाता हैं l फिर भ्रान्ति की उत्पति होती हैं, तत्पश्चात् मानसिक भ्रान्तियों में व्यस्त रहने की प्रेरणा होती हैं, और अन्त में जीवन की कटु यथार्थताओं में पलायन करने का चस्का स्थायी रूप से उत्पन्न हो जाता हैं l
चाय के सेवन से शरीर की जीवन शक्ति क्षय हो जाता हैं, कारण चाय पीने से फेफड़ों द्वारा कार्बोलिक एसीड गैस का निष्कासन अधिक होता हैं l जो इस बात का घोतक हैं कि जीवन शक्ति का क्षय अधिक होता हैं l जीवन-शक्ति के इस प्रकार के क्षय से बुढ़ापा शीघ्र आता हैंl चाय पीने से पाचन शक्ति कुंठित हो जाती हैं l गर्म चाय पीने से पेट के भीतरी अवयव शिथिल पड़ जाते हैं l जिससे पाचन का काम अधिकांशत: ठप्प पड़ जाता हैं, तथा वायु में पाए जाने वाले टेनिन विषय द्वारा पित्त के प्रधान अंग पेप्सीन का व्यर्थ क्षय होने लगता हैं l इन कारणों से अजीर्न, मंदागनी तथा कोष्ठ बद्धता जैसे भयंकर रोग उत्पन्न हो जाते हैं l चाय के साथ अतिरिक्त चीनी लेने से अक्सर लोगों को मधुमेह की बीमारी हो जाती हैं l चाय पीने वाला लोग बहुधा वीर्य दोष बहुमूत्र तथा स्वप्नदोष आदि बीमारियों से घिरे रहते हैं l चाय में पाए जाने वाले एक नहीं बल्कि अनेक तीव्र जहरों का पता वैज्ञानिको ने लगाया हैं l
इन जहरों में खास बात यह हैं कि इनका प्रभाव शरीर पर एकाएक नहीं पड़ता और न इनके तत्सम्बन्धी चिन्ह शरीर पर तुरंत दृष्टिगोचर होते हैं l बल्कि इनका जहरीला प्रभाव शरीर के भीतरी अवयवों को धीरे -धीरे और चोर की तरह आक्रांत करता हैं, उसकी आँखें तब खुलती hai, जब चाय उसकी जीवन -संगिनी बन चुकी होती हैं, और उसके स्वास्थ्य का दिवाला पिट चुका होता हैं l
” टेनिस या टेनिज ” वह मसाला या जहर हैं जो साधारण तौर पर चमड़े को अधिक दबीज या चिकना करने के लिए चमड़ों के कारखानों में व्यबहार या प्रयोग में लाया जाता हैं l दूसरा जहर जो चाय में पाया जाता हैं, वह कैफ़ीन हैं l यह प्रभाव में मदिरा और तम्बाकू में पाए जाने वाले तीव्र जहर निकोटिन के सदृश्य होता हैं l आमतौर पर एक प्याले या कप चाय में पांच ग्रेन के लगभग कैफ़ीन होता हैं l इस जहर से दिल की धड़कन एकदम बन्द होकर आदमी मर भी सकता हैं l एक डॉक्टर ने अनुभव करने के लिए स्वयं दो ओन्स लगभग सात ग्रेन कैफ़ीन रही होगी उसे पिया तो वे बेहोश होकर पृथ्वी पर गिर पड़े l इसलिए डॉक्टर लोग कैफ़ीन जहर को दवाई के रूप में देते हैं, तो इसकी मात्रा दो या तीन ग्रेन से अधिक नहीं होती l इसका सबसे ख़राब असर स्नायुओं और वात स्थान पर पड़ता हैं, जिससे अनिद्रा और मन में अशांति पैदा होती हैं l
चाय यानि कैफ़ीन नित्य दिन लेते रहने से आँख की पुतली के अंदरूनी सेहत पर दबाव पड़ता हैं, जिससे नाड़िया उत्तेजित हो जाती हैं l फलस्वरूप दबाव में तीव्रता आती हैं l चाय में एसीड आकजैलिक नाम का जहर भी होता हैं l यह शरीर से जितना निकलता हैं उसका चार गुणा एक प्याले या कप चाय में होता हैं l इसके अतिरिक्त कैफ़ीन रक्तचाप को बढाती हैं l आज के समय में ह्रदय और रक्त वाहिनियो के रोगियों और रोग की जनसंख्या काफ़ी बढ़ती जा रही हैं l उसका विशेष कारण चाय या काफ़ी का प्रयोग ही रहा हैं l चाय सम्बन्धी एक विशेष तथ्य जो बहुत ही महत्वपूर्ण हैं कि जिस जमीन या खेत में चाय की खेती होती हैं, उस जमीन या खेत की उपजाऊ शक्ति दिन -ब -दिन क्षीण हो जाती हैं l उस जमीन या खेत में किसी बीज के उत्पन्न करने की शक्ति नहीं रह जाती हैं l चाय पीना स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं l हर कोई जीना चाहता हैं, कोई मौत दर्द नहीं चाहता l फिर भी मर्जी आपकी ?

