नामली की महापंचायत—नशामुक्ति का संकल्प या केवल चर्चा का मंच? एक माह बाद होगी कार्यों की समीक्षा, पारदर्शिता और जनप्रतिनिधित्व पर उठे सवाल

मन की वाणी

नामली। रतलाम मध्यप्रदेश धार्मिक नगरी नामली में एक बार फिर महापंचायत को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। 30 जुलाई, गुरुवार को शाम 7 बजे आयोजित होने वाली मासिक महापंचायत बैठक के संदेश विभिन्न व्हाट्सएप समूहों में प्रसारित किए गए हैं, जिनमें नगरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपने सुझाव देने की अपील की गई है। यह बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है, जब एक माह पूर्व नगर हित, नशामुक्ति और सामाजिक समन्वय को लेकर लिए गए संकल्पों की समीक्षा को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है।

होली चौक से शुरू हुई थी पहल

करीब एक माह पहले होली चौक पर नगर हितों को लेकर एक बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में तत्कालीन एसडीओपी (डीएसपी) किशोर पाटनवाला तथा थाना प्रभारी अमित कोरी स्वयं उपस्थित हुए थे। दोनों अधिकारियों ने नागरिकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा था कि पुलिस नशे के विरुद्ध अभियान चलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा आमजन के सहयोग से ही अपराध और नशे पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। बैठक में विशेष रूप से युवाओं को एमडी ड्रग्स, स्मैक, गांजा, शराब एवं अन्य मादक पदार्थों से दूर रखने का संकल्प लिया गया था। साथ ही नगर में शांति, भाईचारा और सुरक्षित वातावरण बनाए रखने का आह्वान किया गया था।

किरायेदारों का सत्यापन आज भी अधूरा?

बैठक के दौरान पुलिस अधिकारियों ने नगरवासियों से अपील की थी कि अपने यहां रहने वाले किरायेदारों एवं बाहरी मजदूरों की जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराएं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। हालांकि स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि अब तक इस दिशा में व्यापक स्तर पर किरायेदारों की सूची पुलिस को उपलब्ध कराने की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है।

एक माह में क्या बदला?

महापंचायत की यह बैठक पिछले एक माह के कार्यों की समीक्षा के रूप में भी देखी जा रही है। नगरवासियों के बीच कई सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं—

क्या नशामुक्ति अभियान का कोई ठोस परिणाम सामने आया?

क्या असामाजिक तत्वों की गतिविधियों में कमी आई?

क्या युवाओं में जनजागरूकता बढ़ी?

क्या पुलिस और समाज के बीच समन्वय मजबूत हुआ?

क्या किरायेदारों और बाहरी मजदूरों का सत्यापन हुआ?

क्या नगर हित में लिए गए निर्णयों पर अमल हुआ?

इन सभी विषयों पर आज की बैठक में चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

अवैध शराब को लेकर चिंता बरकरार

स्थानीय लोगों का कहना है कि नामली एवं आसपास के क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। नागरिक अपेक्षा कर रहे हैं कि नशामुक्ति के संकल्प के साथ-साथ संबंधित विभाग इस दिशा में भी प्रभावी कार्रवाई करें। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना शेष है तथा संबंधित विभाग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।

जनसंख्या बढ़ी, प्रतिनिधित्व पर भी सवाल

भारत सरकार की वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार नामली नगर परिषद की जनसंख्या 9,774 थी। वर्ष 2027 में नई जनगणना प्रस्तावित है। स्थानीय स्तर पर अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्तमान में नगर की आबादी लगभग 15 हजार के आसपास हो सकती है। यह केवल अनुमान है, आधिकारिक आंकड़ा नहीं।
ऐसे में नागरिकों का मानना है कि यदि महापंचायत पूरे नगर का प्रतिनिधित्व करने वाला मंच है, तो उसमें सभी समाजों, व्यापारियों, महिलाओं, युवाओं, किसानों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी स्पष्ट रूप से दिखाई देना भी आवश्यक है।

कार्यकारिणी को लेकर उठ रहे सवाल

महापंचायत को लेकर नागरिकों के बीच सबसे बड़ा प्रश्न इसकी कार्यकारिणी को लेकर है। अब तक सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि—

महापंचायत का अध्यक्ष कौन है?

उपाध्यक्ष एवं सचिव कौन हैं?

कितने सदस्य मनोनीत किए गए हैं?

किन-किन समाजों को प्रतिनिधित्व दिया गया है?

निर्णय लेने की प्रक्रिया क्या होगी?

नगरवासियों का मानना है कि यदि कार्यकारिणी सार्वजनिक होगी तो महापंचायत की पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों मजबूत होंगी।

समाजसेवी बंटी डाबी का मत

समाजसेवी बंटी डाबी का कहना है कि महापंचायत की बैठक प्रत्येक माह आयोजित की जाती है। उनके अनुसार इस बार की बैठक में पिछले एक माह के कार्यों की समीक्षा होना आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नशामुक्ति, असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण और नगर हित के विषयों पर कितना कार्य हुआ तथा आगे की कार्ययोजना क्या होगी।

महापंचायत की कानूनी स्थिति क्या है?

महापंचायत सामाजिक संवाद और जनजागरूकता का एक मंच हो सकती है, लेकिन इसे किसी प्रकार की वैधानिक अथवा सरकारी संस्था का दर्जा प्राप्त नहीं है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई करना तथा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाना पुलिस और संबंधित शासकीय विभागों की वैधानिक जिम्मेदारी है। महापंचायत प्रशासन का स्थान नहीं ले सकती, बल्कि जनसहयोग और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से सकारात्मक भूमिका निभा सकती है।

अब सबकी नजर आज की बैठक पर

30 जुलाई की शाम 7 बजे होने वाली महापंचायत बैठक को लेकर नगरवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं। यह बैठक केवल चर्चा तक सीमित रहती है या नशामुक्ति, जनभागीदारी, पारदर्शिता, सामाजिक समरसता और नगर विकास के लिए ठोस एवं समयबद्ध कार्ययोजना सामने आती है, यह बैठक के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

…… दिलीप कर्णधार

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