बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी पर रतलाम प्रशासन का सख्त

कलेक्टर मिशा सिंह बोलीं— कानून तोड़ा तो होगी कड़ी कार्रवाई
रतलाम | पुलिस दर्पण
रतलाम के न्यू कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बाल श्रम जिला टास्क फोर्स एवं बंधुआ श्रम जिला सतर्कता समिति की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह ने की। इस दौरान बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए तथा संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए।
जिला श्रम पदाधिकारी प्रकाश डुडवे ने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 (संशोधन-2016) के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार के श्रम में नियोजित करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने पर 6 माह से 2 वर्ष तक की सजा तथा 20 हजार से 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को केवल गैर-परिसंकटमय कार्यों में निर्धारित शर्तों के तहत ही नियोजित किया जा सकता है। नियोजकों को संबंधित निरीक्षक को सूचना देना, श्रमिकों का रिकॉर्ड संधारित करना, छह घंटे से अधिक कार्य न कराना, विश्राम देना, रात्रिकालीन कार्य नहीं लेना तथा साप्ताहिक अवकाश और सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
बैठक में बंधुआ श्रमिक पुनर्वास योजना-2021 की भी जानकारी दी गई। योजना के तहत मुक्त कराए गए वयस्क बंधुआ श्रमिक को 1 लाख रुपये, विशेष श्रेणी, महिलाओं एवं अनाथ बच्चों को 2 लाख रुपये, जबकि शारीरिक शोषण या मानव तस्करी के शिकार बंधुआ श्रमिकों को 3 लाख रुपये तक की सहायता राशि प्रदान की जाती है। विमुक्ति प्रमाण-पत्र जारी होने पर तत्काल 30 हजार रुपये की अंतरिम सहायता भी दी जाती है।
कलेक्टर मिशा सिंह ने निर्देश दिए कि जिले से अन्य राज्यों या जिलों में काम करने जाने वाले सभी श्रमिकों का डेटा तैयार कर प्रवासी श्रमिक पोर्टल पर पंजीयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि श्रमिक स्वयं भी अपनी नजदीकी ग्राम पंचायत में आसानी से पंजीयन करा सकते हैं। साथ ही श्रमिकों के नियोजकों एवं ठेकेदारों की सूची संबंधित थानों में संधारित की जाए तथा ग्राम सभाओं के माध्यम से लोगों को श्रम कानूनों की जानकारी दी जाए।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि कानून का उल्लंघन पाए जाने पर एसडीएम अथवा तहसीलदार के माध्यम से 50 हजार रुपये तक के बॉन्ड ओवर की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि यदि कहीं बाल श्रम करते हुए बच्चे दिखाई दें तो इसकी सूचना तत्काल 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर दें।
बैठक में श्रमिकों की सुविधा के लिए लेबर मार्केट हेतु उपयुक्त स्थान चयन कर छायादार एवं व्यवस्थित व्यवस्था विकसित करने के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी वैशाली जैन, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास सुभाष चंद्र जैन, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष शंभू चौधरी, सीजेपीयू की सरोज जादौन सहित जिला टास्क फोर्स एवं बंधुआ श्रम सतर्कता समिति के सदस्य और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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