बगलामुखी मंदिर में फर्जी दान रसीदों का मामला: अवैध वसूली पर सरकार सख्त, जांच के बाद होगी बड़ी कार्रवाई।
मंत्री धर्मेंद्र लोधी का बड़ा बयान—फर्जी रसीदें छापकर श्रद्धालुओं से वसूली करने वालों को नहीं बख्शा जाएगा। कलेक्टर के नेतृत्व में गठित जांच समिति करेगी पूरे मामले की पड़ताल, डिजिटल दान प्रणाली लागू करने की तैयारी।
आगर-मालवा / इंदौर | पुलिस दर्पण।
मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले के विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी सिद्धपीठ, नलखेड़ा में कथित फर्जी दान रसीदों और अवैध चंदा वसूली का मामला अब गंभीर प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है। प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक आस्था एवं धर्म (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने स्पष्ट कहा है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति या समूह श्रद्धालुओं से फर्जी रसीदों के माध्यम से अवैध दान वसूलते पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने बताया कि कुछ ऐसे लोग, जिनका मंदिर की अधिकृत प्रबंधन समिति से कोई संबंध नहीं था, कथित रूप से फर्जी दान रसीदें छापकर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं से धन एकत्र कर रहे थे। शिकायत सामने आने के बाद जिला प्रशासन को तत्काल जांच के निर्देश दिए गए और कलेक्टर के नेतृत्व में विशेष जांच समिति गठित की गई है।
बैंक खाते,रसीदें और वित्तीय रिकॉर्ड होंगे जांच के दायरे में।
जांच समिति मंदिर से जुड़े बैंक खातों, दान रजिस्टर, रसीद पुस्तिकाओं, वित्तीय दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की विस्तृत जांच करेगी। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या गबन हुआ है या नहीं तथा यदि हुआ है तो उसकी वास्तविक राशि कितनी है।
सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति।
मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक संस्थानों में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामलों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के राज्य प्रबंधित मंदिरों का प्रत्येक तीन माह में वित्तीय ऑडिट कराया जाता है ताकि दान राशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ हो सके।
अब डिजिटल होगी दान व्यवस्था।
भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार मंदिरों में डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रही है। श्रद्धालु आधिकारिक QR कोड के माध्यम से सीधे मंदिर समिति के खाते में दान कर सकेंगे। इससे नकद लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी रसीदों की संभावना कम होगी।
मंत्री ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को दान देने से पहले उसकी प्रामाणिकता अवश्य जांच लें और केवल अधिकृत काउंटर या आधिकारिक डिजिटल माध्यम से ही दान करें।
मां बगलामुखी सिद्धपीठ: आस्था,तंत्र साधना और इतिहास का अद्भुत संगम।
आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में लखुंदर (प्राचीन नाम लक्ष्मणा) नदी के तट पर स्थित मां बगलामुखी सिद्धपीठ देश के प्रमुख शक्ति एवं तांत्रिक साधना स्थलों में गिना जाता है। उज्जैन से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मान्यता है कि यहां विराजमान मां बगलामुखी की प्रतिमा पांडव कालीन है, जिसका उल्लेख कालिका पुराण में भी मिलता है। मंदिर के गर्भगृह में मध्य में मां बगलामुखी, दाईं ओर महालक्ष्मी और बाईं ओर मां सरस्वती पिंडी स्वरूप में विराजमान हैं। इन्हें त्रिशक्ति स्वरूप माना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने अज्ञातवास के दौरान पांडवों को मां बगलामुखी की साधना करने का मार्गदर्शन दिया था। मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं और उनकी साधना शत्रु बाधा निवारण, विजय तथा सिद्धि प्रदान करने वाली मानी जाती है। करीब 500 वर्ष से अधिक पुराने इस सिद्धपीठ के चारों ओर श्मशान भूमि, संतों की समाधियां, प्राचीन वृक्ष और लखुंदर नदी का शांत प्रवाह इसे साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष केंद्र बनाते हैं। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन, पूजा-अर्चना और विशेष तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं।

