उज्जैन से नागपुर तक उमड़ेगी आस्था की डोर, आचार्य विश्वरत्नसागर सूरीश्वर जी के चातुर्मास मंगल प्रवेश में शामिल होगा 100 से अधिक श्रद्धालुओं का प्रतिनिधिमंडल

नवरत्न परिवार एवं अखिल भारतीय श्री जैन श्वेतांबर मालवा महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में वंदे भारत एक्सप्रेस से नागपुर रवाना होंगे श्रद्धालु।

उज्जैन | पुलिस दर्पण

जैन समाज के लिए अत्यंत श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक महत्व रखने वाले चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत परम पूज्य आचार्य श्री विश्वरत्नसागर सूरीश्वर जी महाराज साहेब का भव्य चातुर्मास मंगल प्रवेश 19 जुलाई को महाराष्ट्र के नागपुर स्थित श्री सुमतिनाथ स्वामी जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ, रामदास पेठ में आयोजित होगा। इस धर्ममय आयोजन में देशभर से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

नवरत्न परिवार के राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष राजेश जैन “डग वाला” ने बताया कि चातुर्मास जैन धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पर्व है। वर्षा ऋतु के चार महीनों में साधु-साध्वी भगवंत एक स्थान पर विराजमान रहकर तप, त्याग, स्वाध्याय, प्रवचन और धर्म आराधना के माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं। इसी दौरान पर्युषण महापर्व, प्रतिक्रमण, तपस्या एवं अनेक धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न होते हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि नवरत्न परिवार एवं अखिल भारतीय श्री जैन श्वेतांबर मालवा महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में उज्जैन से श्रद्धालुओं का एक प्रतिनिधिमंडल 18 जुलाई की सुबह वंदे भारत एक्सप्रेस से नागपुर के लिए रवाना होगा। प्रतिनिधिमंडल में नवरत्न परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय जैन, राष्ट्रीय वैयावच्च प्रमुख प्रीतेशजी ओस्तवाल, शैलेंद्र जैन, सुनील जैन (एम.बी. ऑफसेट), मालवा महासंघ ग्रामीण संयोजक सुधीर जैन, दीपक जैन, अंकित जैन, हेमंत जैन सहित 100 से अधिक कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु शामिल रहेंगे।

इस अवसर पर नवरत्न परिवार के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष संजय जैन (आवर) भी राजस्थान प्रदेश के साथियों के साथ यात्रा में शामिल होंगे।

राजेश जैन “डग वाला” ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल आचार्य श्री विश्वरत्नसागर सूरीश्वर जी महाराज साहेब के चातुर्मास मंगल प्रवेश महोत्सव में सहभागी बनकर गुरु आशीर्वाद प्राप्त करेगा। उन्होंने समाज के अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में शामिल होकर धर्मलाभ अर्जित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में धर्म, संस्कार, गुरु भक्ति और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को धार्मिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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