200 से अधिक कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी कर बच्चों को दी सुनने-बोलने की नई जिंदगी

युवा सर्जन डॉ. दिगंत पाटनी को ‘स्वर्णिम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ ने किया सम्मानित, 32 वर्ष की उम्र से शुरू किया था स्वतंत्र रूप से CI सर्जरी का सफर

रतलाम। जन्मजात गंभीर श्रवण बाधिता से जूझ रहे बच्चों के जीवन में सुनने और बोलने की नई उम्मीद जगाने वाले युवा कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जन एवं ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. दिगंत पाटनी को उनकी उल्लेखनीय चिकित्सा एवं मानव सेवा के लिए ‘स्वर्णिम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ का रिकॉर्ड सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया गया।

डॉ. दिगंत पाटनी की स्कूली शिक्षा रतलाम में हुई है। उन्होंने महज 32 वर्ष की उम्र में स्वतंत्र रूप से कॉक्लियर इम्प्लांट (CI) सर्जरी करना शुरू किया। इसके बाद विभिन्न शासकीय योजनाओं के माध्यम से जन्मजात गंभीर श्रवण बाधिता से पीड़ित बच्चों की 200 से अधिक कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं।

बच्चों को मिली सुनने और बोलने की नई उम्मीद

कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के माध्यम से अनेक बच्चों को सुनने की क्षमता हासिल हुई है। इसके परिणामस्वरूप बच्चों के बोलने, शिक्षा प्राप्त करने और सामान्य सामाजिक जीवन में आगे बढ़ने की राह आसान हुई। चिकित्सा विशेषज्ञता के साथ जरूरतमंद एवं वंचित बच्चों के प्रति उनकी सेवा भावना को देखते हुए स्वर्णिम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से उन्हें यह सम्मान दिया गया।

रिकॉर्ड संस्था द्वारा जारी प्रमाण-पत्र में डॉ. पाटनी को “Young Cochlear Implant Surgeon” के रूप में सम्मानित किया गया है।

इंदौर में समारोह के दौरान मिला सम्मान

यह सम्मान इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में प. पू. सुधासागर जी महाराज की पावन निश्रा में प्रदान किया गया। इस अवसर पर विजय बाकलीवाल, अशोक दोशी, नवीन गोधा, वीरेंद्र कुमार जैन, अशोक शास्त्री, सौरभ बडजात्या, गिरीश गिन्नी ग्रुप, पिंकेश टोंग्या, प्रिंसिपल टोंग्या एवं आलोक कोयला सहित अन्य गणमान्यजन मौजूद रहे।

प. पू. सुधासागर जी महाराज ने डॉ. दिगंत पाटनी की मानव सेवा के इस कार्य की सराहना करते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने चिकित्सा के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयास को प्रेरणादायी बताया।

रतलाम से जुड़ा है विशेष रिश्ता

डॉ. दिगंत पाटनी की स्कूली शिक्षा रतलाम में हुई है। वे रतलाम के वरिष्ठ पत्रकार एवं कर सलाहकार दिलीप पाटनी के पुत्र हैं। डॉ. पाटनी की इस उपलब्धि से रतलाम सहित उनके परिवार, परिचितों और शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है। मानव सेवा और चिकित्सा विशेषज्ञता के संगम से डॉ. दिगंत पाटनी ने कम उम्र में ही सैकड़ों बच्चों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। उनका यह कार्य चिकित्सा क्षेत्र के साथ-साथ समाज के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया है।

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