मोहखेड़ पुलिस ने तीन दिन में सुलझाया अंधे कत्ल का मामला, आरोपी पिता गिरफ्तार
निर्मला पहाडे ब्यूरो प्रमुख छिंदवाड़ा
छिंदवाड़ा। मोहखेड़ थाना क्षेत्र के ग्राम कामठी में 44 वर्षीय कमलेश राऊत की हत्या के मामले में पुलिस ने तीन दिन में खुलासा करते हुए उसके 65 वर्षीय पिता मेहताप राऊत को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, शराब पीकर पैसे मांगने को लेकर पिता-पुत्र के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान पिता ने लकड़ी की पटिया से बेटे के सिर पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल लकड़ी की पटिया भी जब्त की है।
कमरे में मृत मिला था कमलेश
पुलिस के मुताबिक, 28 सितंबर 2026 को मेहताप राऊत ने अपने बेटे कमलेश को कमरे में गद्दे पर मृत अवस्था में पड़ा देखा। उसके सिर पर चोट थी और खून निकल रहा था। दोनों कानों से भी खून निकलने के निशान मिले थे। सूचना पर मोहखेड़ पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल के निरीक्षण और परिजनों एवं गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई।
पूछताछ में पिता ने कबूला जुर्म
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अजय पांडे और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। उप पुलिस अधीक्षक (अजाक) सुनील कुमार बरकड़े के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी सुनील उइके ने जांच शुरू की।
पुलिस को पूछताछ और आसपास के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर परिवार में आए दिन विवाद होने की बात पता चली। संदेह के आधार पर मृतक के पिता मेहताप राऊत से पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में उसने बताया कि 28 सितंबर को कमलेश शराब पीकर घर आया था और पैसे मांगने को लेकर विवाद करने लगा। समझाने के बावजूद वह नहीं माना, तो गुस्से में आकर उसने लकड़ी की पटिया से कमलेश के सिर पर वार कर दिया। इसके बाद उसे धक्का दिया, जिससे वह पलंग की पेटी के सिरहाने लगी एंगल से टकराकर जमीन पर गिर गया। शरीर में हलचल नहीं होने पर उसने कमलेश को गद्दे पर लिटाया और खेत चला गया।
हत्या में प्रयुक्त पटिया जब्त
पुलिस ने आरोपी मेहताप राऊत, उम्र 65 वर्ष, निवासी ग्राम कामठी को गिरफ्तार कर वारदात में इस्तेमाल लकड़ी की पटिया जब्त की है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने की जानकारी पुलिस ने दी।
कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक सुनील उइके, सहायक उपनिरीक्षक कमल सिंह ठाकुर, प्रधान आरक्षक सुरेन्द्र बिंदवारी, बिसराम इनवाती तथा आरक्षक संतोष नर्वेती और रविदास बरमैया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

