…..प्रदीप कुमार नायक
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पकड़ी गई नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री के तार मिथिलांचल के मधुबनी जिले से जुड़ गए हैं। इस मामले में सहारनपुर पुलिस ने राजनगर थाना क्षेत्र के लड्डूगांव निवासी मिथिलेश चौरसिया को गिरफ्तार किया है।
बताया जा रहा है कि मिथिलेश पिछले पांच वर्षों तक राजनगर प्रखंड में प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में काम कर चुका है और स्थानीय स्तर पर मैथिली गीतों में काम करने के कारण भी जाना जाता है। उसकी गिरफ्तारी के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कैसे हुआ खुलासा?
सहारनपुर पुलिस ने 12 सितंबर को हरियाणा के सोनीपत के एक औद्योगिक क्षेत्र में चल रही फैक्ट्री पर छापा मारा था। वहां से गिरोह के सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह समेत पांच लोगों को पकड़ा गया था। उनमें लड्डूगांव का ही संतोष चौरसिया भी शामिल था।
संतोष से पूछताछ में मिथिलेश चौरसिया का नाम सामने आया। इसके बाद सहारनपुर नगर थाने के एसआई इकबाल सिंह तोमर के नेतृत्व में एक टीम राजनगर पहुंची और गुरुवार देर शाम लड्डूगांव में छापेमारी कर मिथिलेश को दबोच लिया। शुक्रवार को पुलिस उसे अपने साथ सहारनपुर ले गई।
5 रुपये में बनता था 20 का सिक्का
पुलिस की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। फैक्ट्री में 20 रुपये का नकली सिक्का बनाने में सिर्फ 5 से 6 रुपये का खर्च आता था। फिर इसे एजेंटों को 12 से 15 रुपये में बेचा जाता था। बाजार में वही सिक्का 20 रुपये में खपाया जाता था।
कम लागत और ज्यादा मुनाफे के लालच में यह गिरोह अब तक करीब 70 करोड़ रुपये के नकली सिक्के बाजार में खपा चुका है। पुलिस ने छापे के दौरान 6,400 तैयार सिक्के जिनकी कीमत 1.28 लाख रुपये थी और करीब 4.5 लाख रुपये के अर्धनिर्मित सिक्के बरामद किए थे। फैक्ट्री में 6 मशीनें लगी थीं जिनसे रोज 10 से 12 हजार सिक्के बनाए जाते थे।
पुलिस के अनुसार गिरोह सहारनपुर में नया ठिकाना बनाने की तैयारी में था, इससे पहले ही पुलिस ने उसके नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया।

