बच्चे की थाली में सूखा चावल और विकास के दावों की चमक
….पण्डित प्रदीप शुक्ल “स्कूल का भोजन दया नहीं, संविधान, मानव पूंजी और राष्ट्र के भविष्य में निवेश है” हरदोई, उत्तर…
….पण्डित प्रदीप शुक्ल “स्कूल का भोजन दया नहीं, संविधान, मानव पूंजी और राष्ट्र के भविष्य में निवेश है” हरदोई, उत्तर…
….पण्डित प्रदीप शुक्ल “भारतीय राजनीति के पुराने नारों के बीच उभर रही एक नई नागरिक चेतना, जिसे केवल वोट-बैंक समझना…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल “शिक्षा, रोजगार और परीक्षा-व्यवस्था पर बढ़ता छात्र असंतोष आखिर किसकी जवाबदेही तय कर रहा है?” किसी भी…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल धर्म भारतीय समाज की आत्मा का एक गहरा और जीवंत हिस्सा रहा है। इसी देश में भक्ति…
“सत्यमेव जयते”—भारत के राजकीय प्रतीक के नीचे अंकित ये तीन शब्द जितने छोटे हैं, उनका नैतिक विस्तार उतना ही विराट…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल “पत्रकार कल्याण केवल सुविधा का प्रश्न नहीं, लोकतांत्रिक गणराज्य की संस्थागत मजबूती का भी प्रश्न है” लोकतंत्र…
…..पण्डित प्रदीप शुक्ल “विदेशी चंदा, छात्र आंदोलन और लोकतंत्र के बीच खड़े असहज सवाल” भारतीय राजनीति में कुछ कानून ऐसे…
……पण्डित प्रदीप शुक्ल भारत में स्त्रियों की सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक बहस अक्सर दो झूठे ध्रुवों के बीच फँस जाती…
……पण्डित प्रदीप शुक्ल तीन विधानसभा उपचुनावों के आधिकारिक परिणाम साफ़ हैं: बिहार के बांकीपुर में जन सुराज पार्टी के प्रशांत…
…..पण्डित प्रदीप शुक्ल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति का एक स्थायी चरित्र रहा है—वह स्वयं को “प्रधानसेवक” कहें या “जनसेवक”,…