शहडोल । एक तरफ मध्य प्रदेश पुलिस युवाओं को नशे के दलदल से बाहर निकालने के लिए “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” जैसा राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान चला रही है,वहीं दूसरी तरफ शहडोल जिले का बुढार क्षेत्र अवैध मादक पदार्थों की तस्करी का नया केंद्र बनता जा रहा है। *
🎤शासन-प्रशासन के तमाम दावों और अभियानों को धता बताते हुए नशे के सौदागरों का एक नया और हाईटेक सिंडिकेट यहाँ पूरी तरह सक्रिय हो चुका है।*
🎤ओडिशा और हथगला से सप्लाई, नेशनल हाईवे बना सेफ कॉरिडोर
*विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे काले कारोबार की डोर ओडिशा और हथगला क्षेत्र में बैठे मुख्य सप्लायरों के हाथों में है, जहाँ से गांजे की बड़ी खेप बेरोकटोक बुढार और आसपास के इलाकों में पहुँचाई जा रही है। पुलिस की पैनी नजर से बचने के लिए इस नए गिरोह ने तरीका भी पूरी तरह बदल लिया है।
🎤अब कबाड़ या पुरानी गाड़ियों के बजाय ब्रांडेड लग्जरी फोर-व्हीलर्स का इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जा रहा है। नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार से दौड़ती ये लग्जरी गाड़ियाँ चेकिंग पॉइंटों को आसानी से चकमा देकर माल को ठिकाने लगा रही हैं।
🎤अपराधियों को संरक्षण, सच लिखने वाली कलम पर पहरा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में जिस बेखौफ अंदाज में यह नया नेटवर्क पनप रहा है, वह स्थानीय सुरक्षा और खुफिया तंत्र पर बड़े सवालिया निशान खड़े करता है। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि जहाँ एक तरफ अवैध कारोबारियों को परोक्ष-अपरोक्ष संरक्षण मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने वाले कलमकारों और निष्पक्ष मीडिया पर दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है।
🎤बड़ा सवाल: जब तक ओडिशा और हथगला में बैठे मुख्य आकाओं (सप्लाई चेन की मुख्य कड़ियों) पर करारा प्रहार नहीं होगा, तब तक क्या केवल औपचारिकता निभाकर नशे के इस अवैध कारोबार को रोका जा सकता है?
पुलिस कार्रवाई पर टिकीं नजरें
🎤प्रदेश सरकार जहाँ नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का दावा कर रही है, वहीं बुढार में लग्जरी गाड़ियों से हो रही गांजा तस्करी ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली को चुनौती दे रही है। 🎤अब देखना यह होगा कि शहडोल पुलिस प्रशासन इस नए लग्जरी सिंडिकेट के नेटवर्क को ध्वस्त करने और इसके मुख्य सरगनाओं तक पहुँचने के लिए क्या सख्त कदम उठाती है।

