इंदौर | पुलिस दर्पण
इंदौर । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान केवल पौधारोपण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राणवायु का स्थायी प्रबंध और प्रकृति संरक्षण का जनआंदोलन है। उन्होंने सभी नागरिकों से जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
रविवार को इंदौर जिले के ग्राम बुढ़ानिया स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) परिसर में आयोजित अमृत हरित महोत्सव-2026 के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री ने अपनी माता स्वर्गीय श्रीमती लीला बाई यादव की स्मृति में संतरे का पौधा लगाकर जिले में 21 लाख पौधारोपण तथा 51 हजार वर्षा जल संचयन इकाइयों के निर्माण के महाअभियान की शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्ष जीवन का आधार हैं और प्रकृति ही ईश्वर का साक्षात स्वरूप है। वृक्ष हमारी नकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण कर हमें प्राणवायु प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि बंजर भूमि को हरियाली से आच्छादित करना प्रकृति माता को हरी चुनरी ओढ़ाने के समान है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से शुरू हुआ ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान अब जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बन चुका है। यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण संरक्षण का राष्ट्रीय मिशन है।
मुख्यमंत्री ने पौधारोपण और जल संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाली सामाजिक संस्था पृथ्वी को 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। साथ ही प्रदेश में नक्सल उन्मूलन अभियान में उल्लेखनीय योगदान देने वाले बीएसएफ के दो जवानों को भी 2-2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवी अहिल्याबाई होल्कर की विरासत से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश सरकार जल संरक्षण के लिए नदियों, तालाबों, कुओं और बावड़ियों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का अभियान चला रही है। उन्होंने इंदौर को जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी तथा बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और स्वयंसेवक उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इंदौर का 21 लाख पौधारोपण और 51 हजार वर्षा जल संचयन इकाइयों का लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।

