संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सीजेपी का शक्ति प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस ने अनुमति से किया इनकार; प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच नोकझोंक
नई दिल्ली | पुलिस दर्पण
नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च को लेकर राजधानी दिल्ली में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। जंतर-मंतर पर सुबह से बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे, जबकि दिल्ली पुलिस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि संसद तक मार्च निकालने की कोई अनुमति नहीं दी गई है।
मौके से सामने आए वीडियो में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकते और कुछ स्थानों पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करते दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच नोकझोंक की घटनाएं भी सामने आईं।
संसद तक मार्च की थी तैयारी
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया था कि हजारों समर्थक संसद तक मार्च निकालकर अपनी मांगें सांसदों के सामने रखेंगे। उनका कहना था कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और प्रतिनिधिमंडल को संसद परिसर में जाकर अपनी बात रखने की अनुमति मिलनी चाहिए।
पुलिस ने अनुमति देने से किया इनकार
दिल्ली पुलिस ने रविवार को जारी एडवाइजरी में कहा था कि संसद मार्च के लिए कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है और किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस के अनुसार नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है, जिसके तहत जंतर-मंतर के निर्धारित प्रदर्शन स्थल के अलावा पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने और जुलूस निकालने पर प्रतिबंध है।
23 दिन बाद खत्म हुई भूख हड़ताल
आंदोलन से जुड़े ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के तीन सदस्यों—नेहा, आमीन और मनीष—ने 23 दिनों की भूख हड़ताल समाप्त कर दी। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जिन्हें स्वास्थ्य खराब होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने हुए हैं। उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि यदि संसद में शिक्षा में जवाबदेही का मुद्दा उठाने का भरोसा मिलता है तो वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं।
विपक्षी नेताओं का समर्थन
रविवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय, इकरा हसन, प्रिया सरोज और कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा सहित कई विपक्षी नेता प्रदर्शन स्थल पहुंचे और आंदोलन के प्रति समर्थन जताया। हालांकि अधिकांश विपक्षी दलों ने औपचारिक रूप से मार्च में शामिल होने की घोषणा नहीं की है।
पुलिस की अपील
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने और बिना अनुमति आयोजित किसी भी मार्च में शामिल न होने की अपील की है। संसद के मानसून सत्र को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

