गुटबाजी पर उठे सवाल… पुलिस की भूमिका पर भी घमासान
राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में धरना-प्रदर्शन बना राजनीतिक चर्चा का केंद्र, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष की नाराज़गी भी आई सामने, नेताओं ने दिए अलग-अलग बयान।
रतलाम / नामली | पुलिस दर्पण
रतलाम । राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस के आह्वान पर मंगलवार को नामली के अंबेडकर चौराहे पर आयोजित धरना-प्रदर्शन कई कारणों से चर्चा का विषय बन गया। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के प्रतीकात्मक पुतले का दहन किया गया। हालांकि कार्यक्रम के दौरान हुई एक घटना और स्थानीय संगठनात्मक राजनीति ने पूरे प्रदर्शन को सुर्खियों में ला दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रदर्शन में लगभग 60 कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। राजनीतिक हलकों में इस अपेक्षाकृत कम उपस्थिति को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। स्थानीय स्तर पर इसे कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी और संगठनात्मक असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है।
अधूरा पुतला बना चर्चा का विषय, जिला सचिव के हाथ झुलसे
प्रदर्शन के दौरान जल्दबाजी में तैयार किए गए पुतले को हाथ में लेकर आग लगाने का प्रयास किया गया। इसी दौरान जिला कांग्रेस सचिव संजय चौहान के हाथ आग की चपेट में आ गए और वे झुलस गए। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल स्थिति संभाली। घटना के बाद यह पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई और सोशल मीडिया पर भी इसकी व्यापक चर्चा हुई। कुछ राजनीतिक विरोधियों ने इस घटना पर तंज कसते हुए कहा कि जल्दबाजी में किया गया प्रदर्शन और पुतला दहन इसी प्रकार की परिस्थितियां पैदा करता है। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया।
गुटबाजी की चर्चाएं तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नामली ब्लॉक में लंबे समय से संगठनात्मक मतभेद चल रहे हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष हर्ष विजय गेहलोत द्वारा ओमप्रकाश पाटीदार को ब्लॉक अध्यक्ष बनाए जाने के बाद संगठन के भीतर असंतोष की चर्चाएं लगातार होती रही हैं। प्रदर्शन में कई वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति ने इन चर्चाओं को और बल दिया।
सुशील नागर बोले— सूचना मिलती तो जरूर आता
पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुशील नागर ने कहा,
“वर्तमान सरकार केवल दिखावे की राजनीति कर रही है। जमीनी सच्चाई देश की जनता समझ चुकी है। युवा, किसान और महिलाएं परेशान हैं। राहुल गांधी जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।”
धरना-प्रदर्शन में अनुपस्थित रहने पर उन्होंने कहा,
“मुझे कार्यक्रम की जानकारी बाद में मिली। यदि समय पर सूचना मिलती तो मैं निश्चित रूप से शामिल होता।”
पूर्व में आयोजित प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मौजूदगी में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में अनुपस्थिति के सवाल पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,
“मेरी एंट्री धमाकेदार होगी।”
संगठनात्मक नियुक्तियों पर उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि नामली क्षेत्र के सक्रिय और योग्य नेताओं की अनदेखी की गई है, जिससे कई कार्यकर्ताओं में असंतोष है।
पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
खोखरा के सरपंच जितेन्द्र डोडिया (जितू बन्ना) पूर्व सरपंच संघ जिला उपाध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए लिखा कि पुलिस की मौजूदगी में प्रधानमंत्री का पुतला दहन कैसे हुआ। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठाए। इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। और जितेन्द्र डोडिया ने आरोप लगाया कि प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। उनका कहना था कि यदि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का पुतला दहन किया जाता है तो प्रशासन को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का प्रतीकात्मक पुतला भी जलाया गया।
एल्डरमैन की अपील
नगर परिषद नामली के एल्डरमैन कीर्ति कुमार जयसवाल ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल को संविधान के दायरे में अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के मतभेद का समाधान कानून और संवैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप होना चाहिए तथा शांति, संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सर्वोपरि है।
राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना प्रदर्शन
नामली का यह प्रदर्शन केवल विरोध-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें संगठनात्मक मतभेद, नेताओं की अनुपस्थिति, पुतला दहन के दौरान हुई दुर्घटना तथा पुलिस की भूमिका को लेकर उठे सवालों ने इसे पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया।

