‘पुलिस दर्पण’ के RNI नंबर का कथित दुरुपयोग! फर्जी नियुक्ति पत्र बांटकर लोगों को बनाया जा रहा ‘पदाधिकारी’?

‘पुलिस अधिकार संघर्ष समिति’ के नाम पर जारी नियुक्ति पत्र से उठे सवाल, पुलिस दर्पण ने समिति के गठन से किया इंकार, जांच की मांग।

सह संपादक बैतूल देवीनाथ लोखंडे

बैतूल। पुलिस दर्पण पत्रिका के RNI नंबर (UTTHIN/2011/37501) तथा लेटरहेड पर अंकित “पुलिस दर्पण पत्रिका द्वारा संचालित” शब्दों का उपयोग कर लोगों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाने का मामला सामने आया है। वहीं, पुलिस दर्पण पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल का कहना है कि उनके द्वारा “पुलिस अधिकार संघर्ष समिति” नामक किसी भी समिति का गठन नहीं किया गया है और न ही इस प्रकार के किसी नियुक्ति पत्र को जारी करने की अनुमति दी गई है। ऐसे में पूरे मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक नियुक्ति पत्र में “पुलिस अधिकार संघर्ष समिति” का लेटरहेड इस्तेमाल किया गया है, जिस पर पुलिस दर्पण पत्रिका का RNI नंबर (UTTHIN/2011/37501) तथा “पुलिस दर्पण पत्रिका द्वारा संचालित” अंकित है। इससे यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि पत्रिका के नाम एवं RNI नंबर का कथित रूप से उपयोग कर लोगों को संगठन में नियुक्तियां दी जा रही हैं।

वायरल दस्तावेज में एक व्यक्ति को संगठन में पद पर नियुक्त किए जाने का उल्लेख है। नियुक्ति पत्र पर पदाधिकारियों के नाम, मोबाइल नंबर, हस्ताक्षर एवं मुहर भी अंकित हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उक्त नियुक्तियां किस वैधानिक प्रक्रिया के तहत की गई हैं और संबंधित व्यक्तियों को इस प्रकार के नियुक्ति पत्र जारी करने का अधिकार किस आधार पर प्राप्त है।

यदि किसी समाचार पत्र, पत्रिका अथवा उसके RNI पंजीयन नंबर का उपयोग बिना वैधानिक अनुमति के किसी अन्य संगठन के नियुक्ति पत्र या आधिकारिक दस्तावेज में किया जा रहा है, तो यह गंभीर जांच का विषय हो सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित सक्षम प्राधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की वैधता, RNI नंबर के उपयोग तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच आवश्यक है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस प्रकार के नियुक्ति पत्रों के माध्यम से लोगों को संगठन में पदाधिकारी बनाकर भ्रमित किया जा रहा है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।

जांच के प्रमुख बिंदु

क्या वायरल नियुक्ति पत्र वैध एवं अधिकृत है?

पुलिस दर्पण पत्रिका के RNI नंबर (UTTHIN/2011/37501) का उपयोग किस अधिकार से किया गया?

क्या पुलिस दर्पण पत्रिका एवं न्यूज पोर्टल की अनुमति के बिना उनके नाम का उपयोग किया गया?

क्या लोगों को गुमराह कर संगठन में नियुक्तियां दी जा रही हैं?

यदि जांच में अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

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