रतलाम । धार्मिक नगरी नामली में लगभग एक माह पूर्व होली चौक पर बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और समाज के जिम्मेदार लोगों की मौजूदगी में एक जनभागीदारी बैठक आयोजित की गई, जिसे “महापंचायत” का नाम दिया गया। बैठक में लगभग 300 लोगों की उपस्थिति बताई गई। बैठक का उद्देश्य नगर में बढ़ते नशे, बाहरी असामाजिक तत्वों की गतिविधियों और युवाओं के भटकाव पर रोक लगाने के लिए सामाजिक सहभागिता सुनिश्चित करना था।
बैठक के दौरान एक रजिस्टर में प्रस्ताव लिखे गए, जिस पर उपस्थित लोगों ने हस्ताक्षर भी किए। उपलब्ध रजिस्टर के पृष्ठ में भी बैठक की कार्यवाही दर्ज दिखाई देती है, जिसमें बाहरी व्यक्तियों की जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराने तथा सामाजिक सहयोग से व्यवस्था बनाए रखने जैसे विषयों का उल्लेख है।
उस समय तत्कालीन एसडीओपी (वर्तमान डीएसपी) किशोर पाटनवाला एवं थाना प्रभारी अमित कोरी भी मौजूद थे। पुलिस अधिकारियों ने युवाओं को नशे के विरुद्ध जागरूक करने, अवैध गतिविधियों की सूचना पुलिस तक पहुंचाने तथा नगर में रहने वाले किरायेदारों एवं बाहरी मजदूरों का विवरण पुलिस को उपलब्ध कराने की अपील की थी।
सवाल यह है कि एक माह बाद बदला क्या?
नगर में आज भी अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें सामने आती हैं। युवाओं में नशे का बढ़ता आकर्षण चिंता का विषय बना हुआ है। हाल ही में नगर के एक ढाबे से अवैध एमडी ड्रग्स बरामद होने की घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या महापंचायत के संकल्प धरातल पर उतर पाए?
यदि वास्तव में नशे के खिलाफ सामाजिक अभियान चलाया जाना था तो उसकी निरंतरता दिखाई क्यों नहीं दी? किरायेदारों और बाहरी मजदूरों का रिकॉर्ड पुलिस तक पहुंचाने की पहल भी अपेक्षित स्तर पर नहीं हो सकी।
दूसरी बैठक रही फीकी
गुरुवार को होली चौक स्थित मंदिर पर दूसरी बैठक आयोजित हुई, लेकिन इसमें केवल सीमित संख्या में वरिष्ठजन उपस्थित रहे। आम नागरिकों की भागीदारी लगभग नगण्य रही। बैठक के एजेंडे में उल्लेख किया गया कि कोई विशेष घटनाक्रम नहीं होने से बैठक शांतिपूर्ण रही, जबकि नगर में हाल ही में नशीले पदार्थ की बरामदगी चर्चा का विषय बनी हुई है।
वरिष्ठ समाजसेवी भगवतीलाल गेहलोत (मिश्रा जी) के अनुसार बैठक में कोई विशेष चर्चा नहीं हो सकी। कई लोगों को मोबाइल पर आमंत्रित किया गया था, लेकिन बारिश सहित अन्य कारणों से अधिकांश लोग नहीं पहुंचे।
वहीं पार्षद प्रतिनिधि अजय जोगचंद ने बताया कि गिने-चुने लोगों के बीच बैठक सम्पन्न हुई तथा कोई विशेष विषय नहीं होने के कारण अगली बैठक अगले माह प्रस्तावित की गई है।
हृदय की वाणी
नामली एक छोटा, धार्मिक और सामाजिक समरसता वाला नगर है। यहां यदि समाज, प्रशासन, पुलिस, जनप्रतिनिधि और युवा मिलकर संकल्प लें तो नशे जैसी बुराई को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है। केवल बैठकें आयोजित कर प्रस्ताव लिख देने से परिवर्तन नहीं आता, बल्कि उसके लिए निरंतर जनजागरण, सामाजिक निगरानी, परिवारों की भागीदारी और कानून का सख्ती से पालन आवश्यक है।
यह भी आवश्यक है कि नगर हित में होने वाली ऐसी बैठकों में पारदर्शिता बनी रहे। जब उद्देश्य समाज का कल्याण हो तो उसकी जानकारी आम जनता तक खुलकर पहुंचे, ताकि प्रत्येक नागरिक स्वयं को इस अभियान का सहभागी समझे।
नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यदि युवा पीढ़ी को सही दिशा नहीं मिली तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
नामली को महापंचायत की नहीं, बल्कि महा-जागरूकता, महा-जनभागीदारी और निरंतर सामाजिक संकल्प की आवश्यकता है। तभी नशामुक्त, सुरक्षित और संस्कारित नगर का सपना साकार हो सकेगा।

