बार-बार गुहार, फिर भी नहीं हटा अतिक्रमण: चरागाह भूमि बचाने जनसुनवाई पहुंचा फरियादी, कलेक्टर ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

रतलाम | पुलिस दर्पण

रतलाम। शासकीय चरागाह भूमि पर कथित अवैध अतिक्रमण और पक्के निर्माण के खिलाफ लंबे समय से शिकायत कर रहे एक ग्रामीण ने मंगलवार को एक बार फिर जिला कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। ग्राम उसरगार निवासी परमानन्द पिता भेरूलाल नागदिया ने कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह को आवेदन सौंपते हुए बताया कि वे पिछले कई महीनों से लगातार शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन अब तक मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

फरियादी के अनुसार, वे इस प्रकरण को लेकर लगभग सात से आठ बार जनसुनवाई में आवेदन दे चुके हैं। हर बार जांच और आश्वासन तो मिला, लेकिन कथित अतिक्रमण आज भी यथावत बना हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह ने तत्काल तहसीलदार कुलभूषण शर्मा को प्रकरण का शीघ्र निराकरण करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

चरागाह भूमि पर वेयरहाउस और पक्के निर्माण का आरोप

आवेदन में उल्लेख किया गया है कि ग्राम उसरगार, तहसील एवं जिला रतलाम स्थित शासकीय चरागाह भूमि सर्वे क्रमांक 51/1 पर मुकेश पिता मदनलाल गेहलोद, अनिल पिता सुखदेव पाटीदार एवं सुनील पिता सुखदेव पाटीदार द्वारा कथित रूप से वेयरहाउस एवं पक्के मकानों का निर्माण कर शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किया गया है।

जांच हुई, पंचनामा बना, फिर भी कार्रवाई अधूरी

फरियादी का कहना है कि पूर्व में की गई शिकायतों के आधार पर संबंधित राजस्व अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया गया था। जांच में कथित अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद भी आज तक निर्माण नहीं हटाया गया। इससे ग्रामीणों में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर निराशा बनी हुई है।

जनसुनवाई में फिर उठी न्याय की मांग

मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में परमानन्द नागदिया ने एक बार फिर अपनी पीड़ा कलेक्टर के समक्ष रखी। उन्होंने कहा कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद शासकीय चरागाह भूमि अब तक अतिक्रमण से मुक्त नहीं हो सकी है। इस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए यदि अतिक्रमण पाया जाता है तो शासकीय भूमि को शीघ्र अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें

अब इस मामले में जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजरें टिकी हैं। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है, तो शासकीय चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई राजस्व विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा मानी जाएगी।

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