स्मार्ट लॉक और डिजिटल सबूतों ने खोली हत्या की गुत्थी, दोष सिद्ध होने पर उम्रकैद तक की सजा संभव।
वॉशिंगटन डीसी / एजेंसी।
अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर को अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। लगभग नौ महीने तक चली विस्तृत जांच के बाद अमेरिकी पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया। मामले में डिजिटल साक्ष्यों, स्मार्ट लॉक और अपार्टमेंट की सुरक्षा प्रणाली से प्राप्त डेटा को अहम सबूत माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान 30 वर्षीय अविनाश नार्ने के रूप में हुई है, जो मूल रूप से तेलंगाना का रहने वाला है और अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत है। उसकी पत्नी रजिता से विवाह 5 जून 2025 को हुआ था।
घटना कैसे सामने आई
जांच एजेंसियों के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 को अविनाश ने पुलिस को फोन कर बताया कि उसकी पत्नी बाथरूम में बंद है और दरवाजा नहीं खोल रही है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां रजिता मृत अवस्था में मिली।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह करीब 40 मिनट के लिए घर से बाहर गया था और लौटने पर पत्नी को बाथरूम में बंद पाया। हालांकि, पुलिस को उसके बयान पर संदेह हुआ, जिसके बाद विस्तृत फॉरेंसिक और डिजिटल जांच शुरू की गई।
जांच में क्या मिला
जांच के दौरान पुलिस ने अपार्टमेंट के स्मार्ट लॉक, सुरक्षा प्रणाली (Security System) और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। पुलिस का आरोप है कि इन तकनीकी साक्ष्यों से आरोपी के बयान और घटनाक्रम में कई विरोधाभास सामने आए।
जांच एजेंसियों का यह भी आरोप है कि महिला की गला घोंटकर हत्या की गई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घटना के अगले दिन आरोपी ने कथित रूप से मृतका की तस्वीर भारत में रहने वाली अपनी एक महिला मित्र को भेजी थी। इस पहलू की भी जांच की गई।
9 महीने बाद गिरफ्तारी
लगभग नौ महीने तक चले साक्ष्य संकलन, फॉरेंसिक जांच और डिजिटल विश्लेषण के बाद पुलिस ने अविनाश को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। फिलहाल वह न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी की जमानत के लिए 5 मिलियन डॉलर (करीब 47 करोड़ रुपये) की राशि निर्धारित की गई है। यदि अदालत में हत्या का आरोप सिद्ध होता है, तो उसे अमेरिकी कानून के तहत उम्रकैद जैसी कठोर सजा हो सकती है। पुलिस की जांच जारी अमेरिकी जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्यों की गहन जांच जारी है। अभियोजन पक्ष अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखेगा, जबकि आरोपी को न्यायालय में अपना बचाव प्रस्तुत करने का पूरा अधिकार होगा।

