सागर में मिलावटी शराब से मौत का मामला: ललितपुर से नकली शराब लाकर गांवों में खपाने वाले गिरोह का खुलासा

यूपी के ललितपुर से सागर के सीमावर्ती गांवों तक फैला था नेटवर्क, नकली रैपर-ढक्कन और QR कोड लगाकर बेचते थे शराब; पुलिस ने जांच और छापेमारी तेज की

सागर। पुलिस दर्पण

सागर। मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में कथित तौर पर मिलावटी शराब पीने से हुई मौतों के मामले में प्रारंभिक जांच के दौरान बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच में उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से सटे सागर के सीमावर्ती गांवों में नकली शराब सप्लाई करने वाले गिरोह के सक्रिय होने की बात सामने आई है। आरोप है कि यह गिरोह ललितपुर में नकली शराब तैयार कर उसे कम कीमत पर सागर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई करता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। अधिकारियों की जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि ललितपुर से नकली शराब सागर तक किस माध्यम से पहुंचाई जाती थी और इस नेटवर्क में स्थानीय स्तर पर कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।

ललितपुर पुलिस की कार्रवाई से जुड़े तार

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश की ललितपुर पुलिस ने नकली एवं अवैध शराब की सप्लाई से जुड़े एक गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की थी। पूछताछ के दौरान आरोपियों द्वारा कथित तौर पर सागर के बंडा क्षेत्र सहित अन्य इलाकों में नकली शराब सप्लाई किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
ललितपुर पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने कथित रूप से बताया था कि वे रवि लखेरा, उसकी पत्नी शिवानी लखेरा, चंद्रेश लोधी और मोना राजा के साथ मिलकर ललितपुर में नकली शराब तैयार करते थे। इसके बाद शराब की बोतलों पर नकली रैपर, ढक्कन और QR कोड लगाकर उसे असली शराब जैसा रूप दिया जाता था। बताया गया है कि तैयार की गई नकली शराब को गाड़ियों और बाइक के जरिए सागर जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाया जाता था।

इन गांवों तक पहुंचने का दावा

प्रारंभिक जांच में नकली शराब की कथित सप्लाई बांदरी, बढ़ोदिया, गूगरा खुर्द, नौराज, बैराज सहित सीमावर्ती क्षेत्रों के अन्य गांवों तक किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन स्थानों पर कितनी मात्रा में नकली शराब पहुंचाई गई और वर्तमान घटना में जब्त अथवा सेवन की गई शराब का इसी नेटवर्क से सीधा संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।

नकली शराब को असली दिखाने का तरीका

पूछताछ में सामने आई जानकारी के मुताबिक, गिरोह नकली शराब की बोतलों पर नकली लेबल और ढक्कन लगाता था। इसके बाद QR कोड समेत अन्य पहचान चिन्ह लगाकर इसे असली ब्रांड की शराब जैसा दिखाने का प्रयास किया जाता था। कम कीमत पर ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी सप्लाई किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि नकली शराब की वास्तविक निर्माण प्रक्रिया क्या थी और इसमें कौन-कौन से पदार्थ इस्तेमाल किए जाते थे।

पुलिस की छापेमारी तेज

घटना के बाद पुलिस ने संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ललितपुर से सागर तक नकली शराब पहुंचाने का नेटवर्क कितना बड़ा था, इसमें कितने लोग शामिल हैं और सागर में शराब की सप्लाई तथा बिक्री के स्तर पर कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे। इसके साथ ही प्रशासन द्वारा शराब दुकानों और अवैध शराब के संभावित ठिकानों की जांच भी तेज की जा रही है।

सीएम मोहन यादव ने जताया दुख

घटना पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दुख व्यक्त किया है। सरकार और प्रशासन की ओर से मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को उपचार उपलब्ध कराने और घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने पर है।

कलेक्टर ने अस्पताल पहुंचकर जाना हाल

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अस्पताल पहुंचकर प्रभावित लोगों का हाल जाना और स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने उपचार व्यवस्था की जानकारी लेते हुए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अब पुलिस जांच में यह महत्वपूर्ण सवाल सामने है कि बंडा क्षेत्र में हुई मौतों का नकली शराब से वास्तविक संबंध क्या है और यदि शराब नकली थी तो वह सागर तक किस नेटवर्क के जरिए पहुंची। जांच के आगे बढ़ने के साथ इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है।

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