सदियों पुराना ज्ञान होगा डिजिटल सुरक्षित।
मुरैना / पुलिस दर्पण
भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में मुरैना जिला लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। भारत सरकार के ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत जिले में अब तक 650 से अधिक दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों का पंजीयन किया जा चुका है। इसी क्रम में शनिवार को मुरैना के श्री अभिषेक जैन (आलोक पेंटिंग प्रेस) के निजी संग्रह से 65 अमूल्य हस्तलिखित पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक पंजीकरण किया गया।
संस्कृत, प्राकृत, उर्दू और हिंदी भाषाओं में लिखी गई ये पांडुलिपियां 15वीं से 20वीं शताब्दी के मध्य की हैं। इनके साथ कई प्राचीन मानचित्र, यंत्र-मंत्र तथा देवी-देवताओं के दुर्लभ चित्र भी प्राप्त हुए हैं, जो भारत की धार्मिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक परंपराओं के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री कमलेश कुमार भार्गव के मार्गदर्शन में पुरातत्वविद् डॉ. नवनीत कुमार जैन (भोपाल) ने पांडुलिपियों का पंजीयन, परीक्षण एवं दस्तावेजीकरण का कार्य संपन्न कराया।
विशेषज्ञों के अनुसार ये पांडुलिपियां भारतीय एवं जैन ज्ञान परंपरा, धार्मिक इतिहास, साहित्य, दर्शन, लेखन कला और सांस्कृतिक विकास की जीवंत धरोहर हैं। इनमें निहित ज्ञान तत्कालीन समाज, धर्म, विज्ञान और संस्कृति की अमूल्य जानकारी प्रदान करता है।
ज्ञान भारतम् मिशन के तहत इन पांडुलिपियों का डिजिटल अभिलेखीकरण कर इन्हें सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे देश-विदेश के शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। यह पहल न केवल भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान-संपदा को संरक्षित करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुरैना जिले द्वारा किया जा रहा यह कार्य भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभर रहा है।

