लोकायुक्त ट्रैप के बाद नया खुलासा
शहडोल | पुलिस दर्पण
शहडोल। लोकायुक्त की रिश्वतखोरी कार्रवाई में ट्रैप हुए जयसिंहनगर विकासखंड के उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेश चंद्र शर्मा से जुड़ा एक और गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि वे एक ही समय में शहडोल और श्योपुर—दोनों जिलों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत पदस्थ रहे। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डॉ. शर्मा वर्ष 2021 से श्योपुर जिले के विजयपुर ब्लॉक में सेवाएं दे रहे थे। वहीं वर्ष 2024-25 के दौरान उनकी पदस्थापना शहडोल जिले के जयसिंहनगर विकासखंड स्थित उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी हुई। अब यह जांच का विषय बन गया है कि दोनों जिलों में उनकी सेवा कैसे दर्ज हुई और वेतन भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर संचालित होती रही।
सबसे बड़ा सवाल—क्या दो स्थानों पर एक साथ निभाई गई जिम्मेदारी?
सूत्रों के अनुसार, दोनों जिलों में समय-समय पर उनकी वीआईपी ड्यूटी भी लगाई जाती रही, लेकिन किसी स्तर पर दोहरी पदस्थापना की स्थिति सामने नहीं आई। इससे विभागीय निगरानी प्रणाली की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी संभावित अनियमितता लंबे समय तक कैसे अनदेखी रही।
सार्थक ऐप में उपस्थिति कम, शहडोल में रुका वेतन
जानकारी यह भी सामने आई है कि शहडोल में सार्थक ऐप के माध्यम से उपस्थिति कम दर्ज होने के कारण पिछले कुछ महीनों से उनका वेतन रोका गया था। अब दोहरी पदस्थापना की जानकारी सामने आने के बाद सेवा रिकॉर्ड और वेतन भुगतान की भी विस्तृत जांच की मांग तेज हो गई है।
सीएमएचओ ने मांगी दूसरे जिले से जानकारी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) शहडोल, डॉ. राजेश मिश्रा ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। श्योपुर जिले के सीएमएचओ से सेवा रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेज मांगे जाएंगे। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लोकायुक्त कार्रवाई के बाद बढ़ी जांच की मांग।
हाल ही में रिश्वतखोरी के मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब दोहरी पदस्थापना का मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि दोहरी पदस्थापना किस स्तर पर हुई, इसमें प्रशासनिक प्रक्रिया क्या रही और यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है। सूत्रों के अनुसार, एनएचएम में नियुक्ति और जॉइनिंग संबंधी प्रक्रिया भोपाल स्तर से संचालित होती है, जिसकी भी जांच के दौरान समीक्षा की जा सकती है।

