लोकायुक्त 800 करोड़ के कथित पोषण आहार घोटाले पर सख्त

24 अगस्त को तीन विभागों के शीर्ष अधिकारी कार्रवाई प्रतिवेदन सहित तलब।

महालेखाकार की रिपोर्ट पर तीन वर्ष में भी जवाब नहीं, 14 अनुस्मारक और 5 बार समय-वृद्धि के बावजूद प्रतिवेदन प्रस्तुत न होने पर बढ़ी सख्ती।

रतलामपुलिस दर्पण
प्रदेश के चर्चित कथित 800 करोड़ रुपये के पोषण आहार घोटाले में लोकायुक्त ने सख्त रुख अपनाते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के शीर्ष अधिकारियों को 24 अगस्त 2026 को कार्रवाई प्रतिवेदन (Action Taken Report) सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला पूर्व विधायक पारस सकलेचा द्वारा वर्ष 2023 में लोकायुक्त के समक्ष दायर की गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में महालेखाकार (एजी) की वर्ष 2018 से 2021 के दौरान आठ जिलों में हुई जांच के आधार पर लगभग 800 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले का आरोप लगाया गया था। शिकायत में तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, तत्कालीन संचालक मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ललित मोहन बेलवाल सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई थी।

शिकायत में ललित मोहन बेलवाल की कथित नियम-विरुद्ध संविदा नियुक्ति, वित्तीय अधिकार दिए जाने, उनके विरुद्ध हुई जांच में प्रतिकूल निष्कर्ष आने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने तथा शिकायत उठाने वाले अधिकारियों को प्रताड़ित किए जाने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं।

लोकायुक्त कार्यालय के अनुसार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से महालेखाकार की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन प्राप्त करने के लिए अब तक 14 अनुस्मारक पत्र भेजे जा चुके हैं। पहला पत्र 30 अक्टूबर 2023 और नवीनतम पत्र 23 जून 2026 को भेजा गया, लेकिन विभाग अब तक अपेक्षित प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं कर सका।

विशेष बात यह है कि विभाग ने स्वयं पांच बार अतिरिक्त समय मांगा। लोकायुक्त ने प्रत्येक बार समय-वृद्धि का अनुरोध स्वीकार किया, लेकिन विस्तारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। लगभग तीन वर्षों तक जवाब नहीं मिलने से प्रशासनिक जवाबदेही और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को भी कई अवसर दिए गए, लेकिन वहां से भी अपेक्षित प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुआ। 8 जून 2026 को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रस्तुत जानकारी पर लोकायुक्त ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उपलब्ध कराई गई जानकारी मांगी गई जानकारी के अनुरूप नहीं है तथा उसमें विरोधाभास है। इसके बाद दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को भी 24 अगस्त 2026 को कार्रवाई प्रतिवेदन सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने कहा कि यदि किसी विभाग को बार-बार समय देने के बावजूद वह वर्षों तक कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं करता, तो यह केवल प्रशासनिक शिथिलता नहीं बल्कि पूरी जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी सुनवाई में संबंधित विभाग महालेखाकार की रिपोर्ट पर अब तक की गई कार्रवाई का स्पष्ट एवं तथ्यात्मक विवरण लोकायुक्त के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

प्रदेश की लाखों माताओं और बच्चों से जुड़े पोषण आहार कार्यक्रम में किसी भी प्रकार की अनियमितता या जांच में अनावश्यक विलंब जनहित और सार्वजनिक विश्वास से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें 24 अगस्त 2026 को होने वाली लोकायुक्त की सुनवाई पर टिकी हैं।

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