भक्ति के शिखर पर नामली, लेकिन जर्जर मंदिर की पीड़ा कौन सुनेगा?

सावन सोमवार को बारिश के बीच श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, लगातार तीसरे वर्ष निकलेगी बाबा की भव्य शाही सवारी; 75 वर्ष पुराने मंदिर की छत से टपकता है पानी

नामली/ रतलाम । पुलिस दर्पण

रतलाम जिले की धार्मिक नगरी नामली में सावन मास भगवान शिव की भक्ति और आस्था का विशेष पर्व बनकर सामने आया है। स्टेशन रोड स्थित श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में सावन सोमवार के अवसर पर भगवान नीलकंठेश्वर महादेव का आकर्षक श्रृंगार किया गया तथा मंदिर परिसर को फूल-मालाओं और धार्मिक सजावट से सजाया गया। सुबह से बारिश होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई और दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। इसी धार्मिक माहौल के बीच श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर समिति के तत्वावधान में लगातार तीसरे वर्ष भगवान श्री नीलकंठेश्वर महादेव की भव्य शाही सवारी निकाली जा रही है। दूसरे सोमवार, को शाम 4 बजे स्टेशन रोड स्थित मंदिर से बाबा नीलकंठेश्वर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। समिति ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से बड़ी संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ लेने का आह्वान किया है। लेकिन धार्मिक आस्था के इस भव्य आयोजन के बीच एक गंभीर सवाल भी खड़ा है—जिस प्राचीन मंदिर में हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, उसी मंदिर की जर्जर हालत पर आखिर कब ध्यान दिया जाएगा?

बारिश में छत से टपकता पानी, श्रद्धालुओं की आस्था के बीच परेशानी
मंदिर समिति के अनुसार नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर करीब 75 वर्ष पुराना है। मंदिर का मुख्य निर्माण लगभग 8×8 फीट का बताया गया है। समिति का कहना है कि बारिश के दौरान मंदिर की छत से बड़ी मात्रा में पानी टपकता है, जिससे मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। सावन सोमवार को बारिश के बावजूद जब श्रद्धालु एक लोटा जल भगवान नीलकंठेश्वर महादेव को अर्पित करने पहुंचे तो उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। मंदिर के भीतर भक्ति और बाहर बारिश—दोनों के बीच श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए डटे रहे। मंदिर की वर्तमान स्थिति को देखते हुए समिति और श्रद्धालुओं की मांग है कि प्राचीन धार्मिक स्थल का स्थायी जीर्णोद्धार कराया जाए, ताकि आने वाले वर्षों में भी श्रद्धालु सुरक्षित एवं व्यवस्थित वातावरण में पूजा-अर्चना कर सकें।

पूर्व परिषद के कार्यकाल में हुए थे कई विकास कार्य
मंदिर समिति से जुड़े लोगों के अनुसार पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष नरेंद्र सोनावा के कार्यकाल में मंदिर परिसर में बाउंड्री वॉल का निर्माण, बाउंड्री पर लाइटें, एक कमरे और खुले हाल का निर्माण तथा दो दुकानों का निर्माण कराया गया था। इसके अलावा मंदिर परिसर के एक हिस्से में बाहर से घास मंगवाकर लगाई गई थी।
समिति का कहना है कि इसके बाद मंदिर परिसर के रखरखाव और विकास की गति कमजोर पड़ गई। वर्तमान में परिसर में लगाई गई घास भी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। समिति का आरोप है कि वर्तमान नगर परिषद द्वारा मंदिर की व्यवस्थाओं और रखरखाव पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। और मंदिर परिसर के मुख्य द्वार पर नगर परिषद नामली का नाम अंकित है हालांकि इन आरोपों पर संबंधित नगर परिषद का पक्ष सामने आना बाकी है।

मंदिर का ट्यूबवेल बना आसपास के रहवासियों का सहारा
श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर परिसर धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ आसपास के रहवासियों की पानी की जरूरत से भी जुड़ा हुआ है। समिति के अनुसार स्टेशन क्षेत्र नगर के अन्य हिस्सों की अपेक्षा ऊंचाई पर स्थित है। इसके कारण पानी की टंकी से रेलवे स्टेशन रोड क्षेत्र के कुछ घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। ऐसे में मंदिर परिसर में लगे ट्यूबवेल से क्षेत्रीय रहवासियों को पानी उपलब्ध होने की बात समिति द्वारा कही गई है। समिति के अनुसार इस ट्यूबवेल की बिजली का भुगतान नगर परिषद द्वारा किया जाता है। वहीं समिति का कहना है कि मंदिर के नाम से वर्षों से बिजली बिल आता रहा है, लेकिन मंदिर के बिजली बिल और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर स्थायी व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। पुजारी और पूजा सामग्री का खर्च भी समिति के जिम्मे मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना, आरती और धार्मिक गतिविधियां जारी रखने के लिए पुजारी तथा पूजा सामग्री की आवश्यकता होती है। समिति के अनुसार वर्तमान में पुजारी के मानदेय और पूजा सामग्री का खर्च मंदिर समिति द्वारा वहन किया जा रहा है। समिति का कहना है कि पूर्व में एक पुजारी के खाते में शासन की ओर से नीलकंठेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना और आरती के मेहनताने की राशि प्राप्त हुई थी। समिति चाहती है कि मंदिर की पूजा व्यवस्था के लिए भी स्थायी आर्थिक व्यवस्था बनाई जाए।

श्री वीर हनुमान मंदिर भी जीर्णोद्धार की राह पर
नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर परिसर में स्थित श्री वीर हनुमान मंदिर की स्थिति भी समिति के लिए चिंता का विषय है। समिति के अनुसार मंदिर की जर्जर दीवारों को फिलहाल सीमेंट-प्लास्टर आदि के माध्यम से संभालने का प्रयास किया गया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि मुख्य मंदिर के साथ परिसर के अन्य देवालयों का भी संरक्षण जरूरी है। धार्मिक धरोहरों की मरम्मत केवल त्योहारों के समय सजावट तक सीमित न रहकर स्थायी योजना के तहत होनी चाहिए।

स्वच्छता व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल

मंदिर समिति ने स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई है। समिति का आरोप है कि नगर परिषद द्वारा नियमित रूप से मंदिर परिसर की सफाई नहीं कराई जाती और कई बार समिति के सदस्यों अथवा मजदूरों के माध्यम से सफाई करवानी पड़ती है।
समिति का कहना है कि मंदिर परिसर में पहले लगाई गई घास खत्म हो चुकी है। इस स्थान पर पेवर ब्लॉक लगाने की मांग नगर परिषद से की गई है। इससे बारिश के दिनों में कीचड़ की समस्या कम होगी और श्रद्धालुओं को आवागमन में सुविधा मिलेगी।

दो दुकानों को व्यवस्थित कर मंदिर की आय बढ़ाने की मांग
मंदिर परिसर में बनी दो दुकानों को लेकर भी समिति ने प्रस्ताव रखा है। समिति की मांग है कि दुकानों में शटर लगाए जाएं और उन्हें किराए पर दिया जाए।
यदि दुकानों से नियमित किराया प्राप्त होता है तो उस राशि का उपयोग पुजारी के मानदेय, पूजा सामग्री, सफाई और मंदिर के रखरखाव में किया जा सकता है। इससे समिति को धार्मिक व्यवस्थाओं के लिए अलग से बार-बार राशि एकत्र करने की आवश्यकता कम होगी।

राजनीतिक बैठकें होती रहीं, मंदिर विकास का इंतजार कायम
मंदिर समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष से जुड़े लोगों की राजनीतिक बैठकें भी आयोजित होती रही हैं, लेकिन मंदिर के जीर्णोद्धार और मूलभूत सुविधाओं के स्थायी समाधान की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
समिति का सवाल है कि यदि मंदिर परिसर सामाजिक और सार्वजनिक गतिविधियों के लिए उपयोगी है तो इसके संरक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
🔱 शाही सवारी के साथ उठी मंदिर बचाने की आवाज
भगवान नीलकंठेश्वर महादेव की लगातार तीसरे वर्ष निकलने वाली शाही सवारी नामली की धार्मिक परंपरा और सामूहिक आस्था का प्रतीक बनती जा रही है। सोमवार को बाबा नीलकंठेश्वर की सवारी नगर के प्रमुख मार्गों से निकलेगी और श्रद्धालु जगह-जगह दर्शन कर भगवान का स्वागत करेंगे।
एक ओर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से नामली शिवमय होगा, वहीं दूसरी ओर प्राचीन मंदिर की जर्जर स्थिति जिम्मेदारों के सामने बड़ा सवाल खड़ा करेगी।
श्रद्धालुओं की भावना स्पष्ट है—शाही सवारी हर वर्ष भव्य हो, लेकिन जिस मंदिर से यह आस्था निकलती है, उसका संरक्षण और जीर्णोद्धार भी उतनी ही प्राथमिकता से हो।अब सवाल केवल मंदिर की छत की मरम्मत का नहीं, बल्कि नामली की धार्मिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का है।
हर-हर महादेव 🔱 | जय श्री नीलकंठेश्वर महादेव

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