तबादला आदेश के दो महीने बाद भी बोरदेही थाने में जमे कमल सिंह मेहर, कथित वसूली के आरोपों से उठे सवाल

देवीनाथ लोखंडे सह संपादक दक्षिण मध्यप्रदेश

बोरदेही। बोरदेही थाने में पदस्थ कमल सिंह मेहर को लेकर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार 22 जून 2026 को उनका तबादला अमला थाना किया गया था, लेकिन तबादला आदेश जारी होने के करीब दो महीने बाद भी उनके बोरदेही थाने में पदस्थ रहने की बात सामने आ रही है।

तबादला आदेश जारी होने के बावजूद संबंधित कर्मचारी ने अमला थाने में आमद क्यों नहीं दी, यह सवाल अब चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि आदेश प्रभावी था तो उसकी अनुपालना क्यों नहीं हुई और उन्हें बोरदेही थाने में बने रहने की अनुमति किस स्तर से मिली, इसकी स्थिति पुलिस विभाग को स्पष्ट करनी चाहिए।

कथित अवैध वसूली के आरोप भी चर्चा में

इसी बीच कमल सिंह मेहर पर थाने में कथित अवैध वसूली किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

दो महीने बाद भी तबादले का पालन क्यों नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि 22 जून के तबादला आदेश के बावजूद 22 अगस्त तक कर्मचारी बोरदेही थाने में क्यों बने रहे? क्या उन्हें रोकने के लिए किसी सक्षम अधिकारी ने अलग से आदेश जारी किया था? यदि ऐसा कोई आदेश है तो विभाग को उसकी जानकारी सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तबादला आदेश, रवानगी रजिस्टर, आमद रजिस्टर, ड्यूटी चार्ट और संबंधित अधिकारी के आदेश की जांच की जानी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि तबादला आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ।

अब सवाल यह है कि पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में क्या जवाब देते हैं और 22 जून के तबादला आदेश के बावजूद कमल सिंह मेहर के बोरदेही थाने में बने रहने की वास्तविक वजह क्या है? साथ ही कथित वसूली के आरोपों की जांच कब होगी, इस पर भी निगाहें टिकी हैं।

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