पत्रकारिता की सबसे बड़ी परीक्षा: सत्ता के साथ खड़े होना या सच के साथ?
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल लोकतंत्र में पुलिस, न्यायपालिका, मीडिया और नागरिक—ये चारों एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि जवाबदेही की श्रृंखला के…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल लोकतंत्र में पुलिस, न्यायपालिका, मीडिया और नागरिक—ये चारों एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि जवाबदेही की श्रृंखला के…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल “जब छात्र सड़कों पर हों, संसद मौन हो और सत्ता बैरिकेडों के पीछे खड़ी दिखाई दे, तब…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल स्वतंत्र भारत में परीक्षा-लीक और रद्दीकरणों का कोई एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय “मास्टर-लिस्ट” सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल इतिहास के पन्नों पर दर्ज होता एक विरोध संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राष्ट्रीय राजधानी…
……..पण्डित प्रदीप शुक्ल “जब ईंधन की बचत, उपभोक्ता की जेब और सरकार का दावा एक-दूसरे से टकराने लगें” भारत को…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल “जौहर विश्वविद्यालय पर कार्रवाई कानून की कसौटी है, या सत्ता की भाषा”? उत्तर प्रदेश के रामपुर में…
…..पण्डित प्रदीप शुक्ल किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी संसद की भव्यता से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों की…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल “जिस कैमरे के लेंस में तुम अपनी पूरी ज़िंदगी ढूँढ रहे हो, उसे केवल अपनी कला का…
…….पण्डित प्रदीप शुक्ल देश में महंगाई अब कोई क्षणिक समस्या नहीं रह गई है, वह एक स्थायी जन-पीड़ा में बदलती…
……पण्डित प्रदीप शुक्ल परिवहन क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधन की खोज केवल तकनीकी प्रगति का विषय नहीं है, बल्कि यह देश…