खाकी की इंसानियत! घायल को बचाने वर्दी की परवाह किए बिना सड़क पर दौड़े DSP किशोर पाटनवाला

हादसा आंखों के सामने हुआ तो एक पल भी नहीं रुके, टोलकर्मियों को फोन कर बुलवाई एंबुलेंस; घायलों को खुद उठाकर पहुंचाया वाहन तक

रतलाम। पुलिस दर्पण

रतलाम। बुधवार को फोरलेन मार्ग पर हुए सड़क हादसे के दौरान पुलिस अधिकारी की संवेदनशील और मानवीय भूमिका देखने को मिली। सावन माह के चलते बिलपांक मेले की ड्यूटी पर जा रहे पुलिस एसडीओपी किशोर पाटनवाला जब अपने शासकीय वाहन से फोरलेन मार्ग से गुजर रहे थे, तभी उनकी आंखों के सामने सड़क दुर्घटना हो गई। हादसा देखते ही एसडीओपी पाटनवाला ने बिना देर किए अपना वाहन रुकवाया और तत्काल टोलकर्मियों को मोबाइल फोन कर सहायता एवं एंबुलेंस की व्यवस्था के लिए सूचना दी। इसके बाद वे स्वयं सड़क पर पहुंचे और दुर्घटना में घायल लोगों को संभालते हुए उन्हें एंबुलेंस तक पहुंचाने में मदद की।

वर्दी पर खून के निशान की नहीं, घायल की जिंदगी की चिंता

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे भावुक पहलू यह रहा कि एसडीओपी किशोर पाटनवाला ने घायल व्यक्ति को संभालते समय अपनी वर्दी गंदी होने या उस पर खून के निशान पड़ने की कोई परवाह नहीं की। उनके लिए उस समय वर्दी से कहीं अधिक महत्वपूर्ण घायल की जिंदगी और उसे तत्काल उपचार दिलाना था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा स्वयं सड़क पर उतरकर घायलों की मदद किए जाने का यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी चर्चा का विषय बन गया। आमजन के बीच पुलिस की एक संवेदनशील, मददगार और मानवीय छवि सामने आई।

पहले समझाइश, जरूरत पर सख्ती—यही बनी पहचान

एसडीओपी किशोर पाटनवाला अपनी कार्यशैली के लिए भी चर्चा में रहते हैं। आमजन के मामलों में पहले समझाइश और कानून का पालन कराने की नीति तथा अपराधियों के खिलाफ आवश्यकतानुसार सख्त कार्रवाई उनकी कार्यशैली का हिस्सा मानी जाती है। उनके हंसमुख और सहज व्यवहार के साथ कानून के प्रति सख्त रवैये ने क्षेत्र में पुलिस अधिकारी की अलग पहचान बनाई है। बुधवार की घटना में भी उनकी भूमिका ने यह संदेश दिया कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में मानव जीवन की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण कर्तव्य है।

घायल को मेडिकल कॉलेज भेजा गया

प्राथमिक सहायता के बाद दुर्घटना में घायल लोगों को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज भेजे जाने की जानकारी है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक घायलों के नाम, संख्या और चोटों की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी।फोरलेन पर हुए इस हादसे के बीच DSP किशोर पाटनवाला की तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता ने एक बार फिर खाकी के उस चेहरे को सामने रखा, जिसमें कानून की सख्ती के साथ इंसानियत भी दिखाई देती है।

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