करोड़ों के भवन निर्माण में अनियमितता और मनमानी बरत रहा ठेकेदार, अधिकारी कर रहे अनदेखी,,
शहडोल । दुर्गेश कुमार गुप्ता
नगर के पंडित रामकिशोर शुक्ल स्मृति शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय परिसर में कराए जा रहे निर्माण कार्य को लेकर अनियमितता और भ्रष्टाचार किए जाने के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि, उक्त महाविद्यालय में तीन मंजिला इमारत का निर्माण तय मापदंडों के विपरीत कराया जा रहा है। जिसे उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। बताया गया है कि, उक्त निर्माण में गिट्टी, रेत, उस्ट और सीमेंट को तय मापदंड के विपरीत मिक्सर में
फेटकर पिलर, बीम और छत को कलाई की जा रही है। जागरूक जनों ने मामले में जांच कराए जाने की मांग की है।
मापदंड और तय अनुपात दरकिनार
लोगों ने उक्त निर्माण कार्य के ठेकेदार की निर्माण से संबंधित विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ की बात जनचर्चा का विषय बनी हुई है। कहां जा रहा है कि, विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में ही गोहपारू निवासी तथाकथित ठेकेदार के हौसले बुलंद हैं। परिणाम स्वरूप पटिया
तरीके से मनमानीपूर्ण निर्माण कार्य खुलेआम जारी है। वहीं इस मामले में महाविद्यालय प्रबंधन पर भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। मापदंड और तप अनुपात को दरकिनार कर बन रहे इस तीन मंजिला इमारत को लेकर प्रबंधन की चुप्पी निखित तौर पर लग रहे आरोपों को बल प्रदान करते ही प्रदर्शित है।
आंखें बंद कर अधिकारी बने हैं मेहरबान
सवाल यह उठ रहे हैं कि आखिरकार इस घटिया निर्माण कार्य का जिम्मेदार कौन? क्या कमीशन के फेर में जिम्मेदारों ने अपनी आंखें मूंद रखी है या फिर मामला सुविधा शुल्क का है? जिसके चलते भ्रष्टचार की इबारत खुलेआम, बेखौफ होकर लिखी जा रही है। बिना पानी सिंचाई के एवं डस्ट मिक्स कर खड़ी हो रही यह तीन मंजिला इमारत हादसे का सबब भी बन सकती है। अगर ऐसा हुआ तो, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? बताया गया है. मध्यप्रदेश भवन निर्माण विभाग के जारी टेंडर पर करोड़ों रुपये की लागत से यह काम कराया जा रहा है।
जांच हुई तो कईयों पर गिरेगी गाज
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो, इस इमारत निर्माण में पिलर, बीम और छत तो पड़ गई है। लेकिन, उस पर कभी कोई पानी का हितृकाय या सिंचाई नहीं नहीं हुआ। जिससे बिल्डिंग की मजबूती पर संदेह बना हुआ है और इसके कमजोर होने का दावा भी किया गया है। काम में लगे लोगों ने बताया कि, यहां कभी कोई इंजीनियर नहीं आते। हां, कभी-कभी ठेकेदार जरूर आता है। उसका जैसा निर्देश मिलता है और जो निर्माण सामग्री उपलब्ध होती है, उसी का उपयोग किया जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि, जिम्मेदार विभागीय अमले ने अपनी जेब गर्म कर ठेकेदार को मनमानी करने की खुली छूट दे रखी है। बहरहाल, वास्तविक रूप से सारा सच तो जांच के बाद ही सामने होगा। देखना होगा कि मामले में जांच कब होती है और कार्रवाई की गाज किस-किस पर गिरती है।

