बंजर जमीन से लिखी सफलता की नई इबारत, जैविक खेती के पर्याय बने ग्वालियर के कृषक प्राण सिंह

अमरूद की दो नई किस्में हुईं पेटेंट, 50 हजार से अधिक किसानों को दे चुके हैं प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण

ग्वालियर | पुलिस दर्पण

ग्वालियर । जिले के डबरा विकासखंड के ग्राम बिलौआ निवासी प्रगतिशील किसान प्राण सिंह ने अपनी मेहनत, नवाचार और प्राकृतिक खेती के प्रति समर्पण से बंजर भूमि को हरे-भरे जैविक कृषि फार्म में बदलकर एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है। आज उनकी पहचान केवल ग्वालियर या मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं, बल्कि देशभर में सफल जैविक एवं प्राकृतिक कृषक के रूप में है।

प्राण सिंह ने वर्ष 1984 में एक बंजर और अनुपजाऊ भूमि खरीदी थी। शुरुआती वर्षों में कठिन संघर्ष और लगातार मेहनत के बाद उन्होंने कृषि विभाग के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में जैविक खेती की शुरुआत की। धीरे-धीरे पूरे खेत को प्राकृतिक खेती में परिवर्तित कर दिया और आज वही भूमि फलों और फसलों से लहलहा रही है।

अमरूद की दो नई किस्में बनीं पहचान

प्राण सिंह ने अपने कृषि फार्म पर कई अभिनव प्रयोग किए हैं। उन्होंने अमरूद की “बिलौआ-22” और “बिलौआ रेड” नामक दो नई किस्में विकसित की हैं, जिन्हें पेटेंट भी प्राप्त हो चुका है। इसके अलावा वे जामुन की एक नई किस्म के पंजीकरण की प्रक्रिया में भी जुटे हुए हैं। उनके फार्म पर अमरूद, आम, चीकू, कटहल और जामुन सहित कई फलदार पौधों की जैविक खेती की जा रही है।

देशभर के किसानों के लिए बना प्रेरणा और प्रशिक्षण केन्द्र

प्राण सिंह का कृषि फार्म आज प्राकृतिक खेती सीखने का प्रमुख केन्द्र बन चुका है। अब तक 40 से 50 हजार किसान एवं कृषि के विद्यार्थी यहां प्रशिक्षण लेकर जैविक खेती की आधुनिक तकनीकों को सीख चुके हैं। देश के विभिन्न राज्यों से किसान उनके अनुभवों का लाभ लेने ग्वालियर पहुंचते हैं।

मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

गत 6 जुलाई को राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में आयोजित उन्नत कृषि विषयक संभागीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्राण सिंह के प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट योगदान की सराहना करते हुए उनका सम्मान किया। इस अवसर पर प्राण सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने और वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करने का आह्वान किया।

प्राण सिंह का कहना है कि सही तकनीक, कृषि विभाग के मार्गदर्शन, धैर्य और निरंतर मेहनत से बंजर भूमि को भी उपजाऊ बनाया जा सकता है। उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि का मजबूत आधार भी है।

प्राण सिंह की सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, नवाचार और सतत प्रयासों से हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। उनकी प्रेरक यात्रा आज हजारों किसानों के लिए नई उम्मीद और आत्मनिर्भर खेती का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!