भाजपा राज में करोड़ों के विकास का दावा, सारणी की सड़कें पूछ रहीं—कहां गया पैसा?

नए CMO बिंजवे के सामने बड़ी चुनौती: पुराने निर्माणों की जांच होगी या फिर शुरू होगा नए कामों का खेल?

देवीनाथ लोखंडे सह संपादक दक्षिण मध्यप्रदेश

बैतूल/सारणी। सारणी नगर पालिका में करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के बीच शहर की बदहाल और उखड़ी सड़कें नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। सामने आए ग्राउंड फोटो में सड़क की ऊपरी सतह बुरी तरह उखड़ी दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन विकास कार्यों पर सरकारी राशि खर्च की गई, उनकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी?

नगर में लंबे समय से सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों को लेकर अनियमितताओं की चर्चाएं होती रही हैं। अब नगर पालिका में नए मुख्य नगर पालिका अधिकारी बिंजवे की पदस्थापना के बाद लोगों की निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या पुराने निर्माण कार्यों की निष्पक्ष समीक्षा और तकनीकी जांच होगी?

पुराने कार्यों की फाइल खुले तो सामने आ सकता है पूरा सच

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जाते रहे हैं कि पूर्व में हुए कुछ सड़क निर्माण कार्य अधूरे अथवा अपेक्षित गुणवत्ता के नहीं रहे। पाथाखेड़ा और सारणी क्षेत्र की सड़कों की वर्तमान स्थिति इन दावों की जांच की जरूरत को और मजबूत करती है।

हालांकि किसी अधिकारी या ठेकेदार को बिना जांच भ्रष्टाचार का दोषी ठहराना उचित नहीं है। लेकिन कार्यादेश, तकनीकी स्वीकृति, एमबी बुक, भुगतान बिल, ठेकेदार को किए गए भुगतान और मौके पर हुए वास्तविक निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है।

नए CMO से सवाल—पहले पुराना हिसाब या फिर नया निर्माण?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर पालिका के नए CMO क्या पहले पुराने और क्षतिग्रस्त निर्माण कार्यों का हिसाब-किताब देखेंगे या उन्हीं स्थानों पर नए निर्माण की स्वीकृतियां और भुगतान शुरू होंगे?

यदि सड़क निर्माण के बाद सड़क कुछ ही समय में उखड़ रही है तो उसकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। बार-बार उसी सड़क पर सरकारी पैसा खर्च करना जनता के साथ न्याय नहीं माना जा सकता।

जांच हुई तो दूध का दूध, पानी का पानी

नगरवासियों की मांग है कि सारणी नगर पालिका के पिछले वर्षों के प्रमुख सड़क निर्माण कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण कराया जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि जिन कार्यों के लिए भुगतान किया गया, वे मौके पर कितनी मात्रा और गुणवत्ता में पूरे हुए।

यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर मिलता है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि सभी आरोप निराधार निकलते हैं तो जांच के बाद संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों को भी क्लीन चिट मिल सकती है।

अब असली परीक्षा नए CMO बिंजवे की है—क्या सारणी नगर पालिका में पुराने निर्माणों का हिसाब खुलेगा, या बदहाल सड़कों पर एक बार फिर करोड़ों का नया विकास लिखा जाएगा?

Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!