2020 की जहरीली शराब त्रासदी से लेकर 2026 की लगातार कार्रवाई तक—क्या अवैध शराब के नेटवर्क पर पूरी तरह लगाम लग सकी?
नामली/रतलाम। पुलिस दर्पण
नामली, रतलाम। थाना क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के हवाले से गांव-गांव अवैध शराब की बिक्री, फोरलेन किनारे स्थित कुछ ढाबों पर शाम के बाद शराब परोसे जाने और कथित अनधिकृत ठिकानों की शिकायतें सामने आई है
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि नामली क्षेत्र पहले ही अवैध शराब से जुड़ी एक बड़ी त्रासदी का सामना कर चुका है।
2020 में शराब सेवन के बाद चार मौतों से दहला था नामली क्षेत्र
मई 2020 में नामली थाना क्षेत्र के पंचेड़ और भदवासा गांवों से शराब सेवन के बाद कई लोगों को जिला अस्पताल लाया गया था। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के अनुसार, छह लोगों ने उल्टी, घबराहट और धुंधला दिखाई देने जैसी शिकायतें बताई थीं। इनमें चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो का उपचार जारी था। मृतकों की पहचान ऋतुराज सिंह, विक्की सिंह, जयसिंह सिंह और अर्जुन नाथ के रूप में बताई गई थी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद तत्कालीन नामली थाना प्रभारी को निलंबित किया गया था। उस दौरान रिपोर्ट में कहा गया था कि क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर पुलिस अधीक्षक ने गंभीर नाराजगी जताई थी।
लेकिन वर्षों बाद भी कार्रवाई के मामले सामने आ रहे हैं
2025 में नामली थाना क्षेत्र के रिंगनिया गांव में एक खंडहरनुमा मकान से छह लाख रुपये से अधिक कीमत की अवैध शराब बरामद किए जाने की खबर सामने आई थी। पुलिस ने मकान से भारी मात्रा में शराब बरामद कर आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया था। अप्रैल 2026 में नामली पुलिस ने सेमलिया गांव में खेत में भूसे के कंडों के बीच छिपाकर रखी गई 10 पेटी शराब बरामद की। इसके अलावा पंचेड़ फंटा के पास दो आरोपियों से भी शराब बरामद की गई। दोनों कार्रवाइयों में कुल 103.68 बल्क लीटर अवैध शराब जब्त किए जाने की रिपोर्ट प्रकाश में आई थी।
जून 2026 में नामली में पुलिस द्वारा 19 पेटी, यानी कुल 211.3 बल्क लीटर अवैध शराब जब्त किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई थी। पुलिस ने मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था, जबकि दूसरे व्यक्ति की तलाश बताई गई थी। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि नामली क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई लगातार हो रही है। हालांकि, ऐसे मामले सामने आना यह सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर अवैध शराब की आपूर्ति पूरी तरह बंद क्यों नहीं हो पा रही है।
फोरलेन के ढाबों पर भी निगरानी की जरूरत
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी सामने आते रहे हैं कि फोरलेन मार्ग के किनारे संचालित कुछ ढाबों पर शाम होते ही शराबखोरी का माहौल बन जाता है। नामली क्षेत्र के ढाबों पर अवैध शराब बिक्री की शिकायते सामने आती रहती है।
पल्दुना में स्कूल और पंचायत भवन के आसपास कथित शराब बिक्री—जांच की मांग
स्थानीय सूत्रों के हवाले से यह शिकायत भी सामने आ रही है कि ग्राम पंचायत पल्दुना में पंचायत भवन के आसपास तथा विद्यालय परिसर के आगे एक हिस्से मे एक गुमटी में लंबे समय से कथित रूप से अवैध शराब बेची जा रही है।
‘डायरी’ और उधारी के हिसाब के दावे की भी जांच जरूरी
स्थानीय सूत्रों द्वारा एक कथित निजी डायरी का उल्लेख किया जा रहा है, जिसमें अवैध शराब की बिक्री और उधारी का हिसाब-किताब दर्ज होने की बात कही जा रही है। ऐसी डायरी या डिजिटल हिसाब-किताब मौजूद है तो वह अवैध शराब नेटवर्क की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है। पुलिस और आबकारी विभाग के जांच का विषय है
पुलिस और आबकारी विभाग नियमानुसार संदिग्ध ठिकानों पर तलाशी, मोबाइल एवं डिजिटल साक्ष्यों तथा लेन-देन के पैटर्न की जांच कर सकते हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि शराब की आपूर्ति कहां से होती है और किन-किन स्थानों तक पहुंचाई जाती है।
कलेक्टर के निर्देशों से बढ़ी जवाबदेही
7 सितंबर 2026 को रतलाम कलेक्टर अजय कटेसरिया ने अवैध एवं नकली शराब के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने आबकारी विभाग को लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुनने और कार्रवाई की जानकारी शिकायतकर्ताओं को देने के निर्देश भी दिए। कलेक्टर ने नामली में पूर्व में हुई नकली शराब की बड़ी घटना का उल्लेख करते हुए ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभाग को लगातार सतर्क रहने को कहा। कलेक्टर ने नकली शराब संबंधी सही सूचना देने वालों को पुरस्कार देने की बात भी कही है।
सबसे बड़ा सवाल—कार्रवाई के बाद फिर सक्रिय क्यों हो जाता है नेटवर्क?
नामली क्षेत्र में वर्ष 2025 और 2026 के दौरान अवैध शराब के खिलाफ कई कार्रवाइयां सामने आने के बावजूद यदि नई शिकायतें लगातार मिल रही हैं तो जांच का दायरा केवल शराब की पेटियां पकड़ने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि शराब के स्रोत, परिवहन, भंडारण, स्थानीय वितरण और आर्थिक लेन-देन की पूरी कड़ी की जांच की जाए। सिर्फ छोटी मात्रा में शराब पकड़कर प्रकरण दर्ज करने के बजाय यह पता लगाना जरूरी है कि शराब गांवों तक कौन पहुंचा रहा है, किस माध्यम से पहुंच रही है और कार्रवाई के बाद वही नेटवर्क दोबारा सक्रिय कैसे हो जाता है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोपों की भी हो निष्पक्ष जांच
स्थानीय सूत्रों द्वारा कथित राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है यदि ऐसे आरोप सामने आ रहे हैं तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जनता की मांग—’छोटे विक्रेताओं पर नहीं, पूरी सप्लाई लाइन पर कार्रवाई हो’
नामली क्षेत्र में अवैध शराब की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस, आबकारी विभाग और प्रशासन के बीच संयुक्त अभियान की आवश्यकता है।
गांवों में संदिग्ध बिक्री केंद्रों की पहचान, फोरलेन के ढाबों की औचक जांच, स्कूल एवं पंचायत भवनों के आसपास विशेष निगरानी, शराब के स्रोत की जांच और बार-बार सामने आने वाले मामलों में सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचना ही स्थायी समाधान हो सकता है।
नामली पहले भी अवैध शराब से जुड़ी त्रासदी झेल चुका है। इसलिए सवाल सिर्फ शराब की पेटियां पकड़ने का नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को खत्म करने का है जो कार्रवाई के बावजूद बार-बार सक्रिय हो जाता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन की सख्ती केवल कुछ दिनों की कार्रवाई तक सीमित रहती है या इस बार नामली क्षेत्र में अवैध शराब के पूरे नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई होती है।

