भोपाल। पुलिस दर्पण
भोपाल। राजधानी भोपाल में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने आंध्र प्रदेश से एक बुजुर्ग दंपती को अपने जाल में फंसाया और करीब 96 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर किसी से संपर्क नहीं करने दिया। ठगों की धमकियों से डरे दंपती ने अपने सोने के जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपए का लोन लिया और आरोपियों के बताए बैंक खाते में जमा करा दिया। ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ितों ने कोलार थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
दिल्ली पुलिस अधिकारी बनकर किया फोन
कोलार के गणपति एन्क्लेव निवासी 65 वर्षीय सुवर्णा लक्ष्मी अपने परिवार के साथ रहती हैं। उनके पति नरसिम्हा राव निजी कंपनी के फाइनेंस विभाग से सेवानिवृत्त हैं। दंपती फरवरी में आंध्र प्रदेश स्थित अपने पैतृक गांव गए थे। इसी दौरान 19 मई को उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से फोन आया।
कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी बताया। उसने दंपती को बताया कि दिल्ली के एक केनरा बैंक खाते से जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है और जांच में उनका नाम भी सामने आया है। इसके बाद आरोपियों ने लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए दंपती पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्हें किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं करने की हिदायत दी गई।
सुप्रीम कोर्ट जज बनकर वीडियो कॉल पर की पूछताछ
साइबर ठगों ने दंपती को डराने के लिए एक व्यक्ति से वीडियो कॉल पर बातचीत कराई और उसे सुप्रीम कोर्ट का जज बताया। संदिग्ध बैंक लेनदेन का आरोप लगाते हुए दंपती को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई। दंपती ने जब लेनदेन से इनकार किया तो आरोपियों ने उनकी सफाई सुनने के बजाय उन्हें लगातार डराया। ठगों के प्रभाव में आए दंपती ने यह बात अपने परिचितों और परिवार के अन्य लोगों को भी नहीं बताई। इसी दौरान वे आंध्र प्रदेश से भोपाल वापस आ गए।
जेवर गिरवी रखकर लिया 22 लाख का लोन
12 जून को दंपती ने कोलार क्षेत्र में अपने सोने के जेवर गिरवी रखकर करीब 22 लाख रुपए का लोन लिया। इसके बाद ठगों द्वारा बताए गए कोलकाता की एक निजी कंपनी के बैंक खाते में रकम जमा कर दी।
रकम मिलने के बाद आरोपियों ने दंपती को बताया कि उन्हें जमानत मिल गई है और उससे संबंधित दस्तावेज कोलार थाने भेज दिए गए हैं। आरोपियों ने कुछ दस्तावेज वाट्सऐप के जरिए भी भेजे।
जब दंपती उन दस्तावेजों को लेकर कोलार थाने पहुंचे तो पुलिस को कागजात संदिग्ध और फर्जी होने का संदेह हुआ। इसके बाद दंपती को समझ आया कि वे साइबर ठगों के जाल में फंस चुके हैं। उन्होंने 23 अगस्त को कोलार थाने में शिकायत दर्ज कराई।
ग्रीन गैस कनेक्शन के नाम पर 2.10 लाख की ठगी
राजधानी में साइबर ठगी का एक अन्य मामला टीटी नगर थाना क्षेत्र में सामने आया है। यहां ग्रीन गैस कनेक्शन दिलाने के नाम पर एक दुकानदार से 2,10,823 रुपए ऑनलाइन ठग लिए गए।
पुलिस के अनुसार, माता मंदिर के पास सीआई हाउस निवासी 43 वर्षीय आयुष कपूर की कलर-पेंट की दुकान है। वह ग्रीन गैस कनेक्शन लेने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान 20 अगस्त को उनके मोबाइल पर अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को ग्रीन गैस कंपनी का कर्मचारी बताते हुए कनेक्शन के लिए एक लिंक भेजा। आयुष ने लिंक पर मांगी गई जानकारी भर दी। इसके बाद आरोपी ने उनसे 13 रुपए जमा करने को कहा। ट्रांजेक्शन सफल नहीं होने पर दूसरे खाते से रकम जमा करने के लिए कहा गया। इसके कुछ देर बाद उनके दोनों खातों से 5-6 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 2,10,823 रुपए कट गए। मोबाइल पर रकम कटने का संदेश आने के बाद उन्हें ठगी का पता चला। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वर्कशॉप में ग्राहकों की रकम अपने खातों में जमा कराने का आरोप, तीन गिरफ्तार
शाहपुरा थाना क्षेत्र में कार वर्कशॉप संचालक के साथ धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने तीन मैकेनिकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक बावड़ियाकला निवासी सर्वेश दुबे की कार वर्कशॉप में फरीद करीब 17 वर्षों से काम कर रहा था। उसका भाई वारिद और परिचित मजदूर मजहर भी वर्कशॉप से जुड़े हुए थे। आरोप है कि तीनों लंबे समय से वर्कशॉप में आने वाले ग्राहकों से कार रिपेयरिंग की रकम लेकर उसे अपने निजी बैंक खातों में जमा करा रहे थे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस तरह कितने ग्राहकों से रकम ली गई और कुल कितनी राशि का गबन किया गया। साइबर ठगी के लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने एक बार फिर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत सामने ला दी है। पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर वीडियो कॉल, लिंक, बैंक खाते या ओटीपी से संबंधित जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती।

