देवी नाथ लोखंडे सह संपादक पुलिस दर्पण दक्षिण मध्य प्रदेश
स्पीड कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के नाम पर 120 से ज्यादा निवेशकों को लगाया चूना? चेक बाउंस के बाद खुली कथित ठगी की परतें, एसपी से शिकायत
बैतूल । कांटेक्ट फार्मिंग के नाम पर हर महीने 8 प्रतिशत तक मुनाफा देने का सपना दिखाकर सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये निवेश कराने का कथित मामला सामने आया है। आरोप है कि 120 से अधिक निवेशकों से करीब 6 करोड़ रुपये की रकम जुटाई गई, लेकिन भुगतान का समय आया तो कथित तौर पर चेक बाउंस होने लगे। मामले को लेकर पीड़ित निवेशकों ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
केंचुआ खाद परियोजना दिखाकर बनाया भरोसा!
मुख्य शिकायतकर्ता उमेश सोनी सहित 108 आवेदकों ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि करनाल की एक कंपनी से जुड़े पदाधिकारियों ने बैतूल के ग्राम बडोरा में संचालित केंचुआ खाद परियोजना दिखाकर लोगों का विश्वास हासिल किया। इसके बाद निवेश करने पर हर माह 8 प्रतिशत तक मुनाफा देने का कथित भरोसा दिलाया गया।
मुनाफे का आकर्षक ऑफर देखकर कई लोगों ने अपनी जमा पूंजी कंपनी में निवेश कर दी। शिकायतकर्ताओं के अनुसार शुरुआत में कुछ समय तक भुगतान भी किया गया, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ। लेकिन बाद में कथित तौर पर भुगतान बंद हो गया।
भुगतान के नाम पर चेक, बैंक पहुंचते ही बाउंस!
निवेशकों के अनुसार जब उन्होंने अपनी रकम और मुनाफे की मांग की तो कंपनी की ओर से भुगतान के लिए चेक दिए गए। लेकिन बैंक में चेक प्रस्तुत करने पर उनके बाउंस होने की बात सामने आई।
शिकायत के साथ मुख्य शिकायतकर्ता उमेश सोनी के नाम जारी 7 लाख 75 हजार रुपये के कथित बाउंस चेक सहित अन्य दस्तावेज भी पुलिस को सौंपे गए हैं। अब यही दस्तावेज पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं।
मूल रकम मांगने पर दूसरी कंपनी में निवेश की सलाह?
पीड़ितों का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी मूल निवेश राशि वापस मांगी तो उन्हें कथित तौर पर दूसरी कंपनी में दोबारा निवेश करने की सलाह दी गई। इसी के बाद निवेशकों को अपने साथ बड़ी धोखाधड़ी होने का संदेह गहराने लगा।
एसपी से एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग
पीड़ित निवेशकों ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सहित संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात एवं अन्य लागू कानूनी धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज करने तथा आरोपियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में कांटेक्ट फार्मिंग के नाम पर करोड़ों रुपये का निवेश जुटाया गया था? कंपनी ने कितने लोगों से कितनी रकम ली? शुरुआती भुगतान के बाद रकम क्यों रोकी गई और चेक आखिर क्यों बाउंस हुए?
इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल मामला शिकायत और लगाए गए आरोपों के स्तर पर है।

