बोरदही पंचायत के निर्माण पर गंभीर सवाल, बिना रोलर, बिना कंप्रेसर सीधे ढलाई… पहली बारिश ने खोल दी निर्माण की पोल, ग्रामीण बोले—सरकारी पैसे की खुली लूट
संवाददाता बैतूल देवीनाथ लोखंडे
बैतूल । मध्यप्रदेश
आमला जनपद की ग्राम पंचायत बोरदही में 15 लाख रुपए की लागत से बनाया जा रहा घाट पहली ही बारिश की मार नहीं झेल पाया। जिस निर्माण को वर्षों तक ग्रामीणों की सुविधा का आधार बनना था, वह पहली बरसात में ही सवालों के कटघरे में खड़ा दिखाई दे रहा है। नदी का तेज बहाव घाट के दोनों ओर की मिट्टी और निर्माण को बहाकर ले गया, जिससे पूरे कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में तकनीकी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। बसवा रेत पर ही बिना मजबूत बेस तैयार किए सीधे कंक्रीट की ढलाई कर दी गई। न जमीन को कंप्रेसर से दबाया गया, न रोलर चलाकर उसे मजबूत बनाया गया। नतीजा सामने है—पहली ही बारिश ने पूरे निर्माण की असलियत उजागर कर दी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन के साथ खुला खिलवाड़ है। यदि निर्माण मानकों के अनुसार किया गया होता तो पहली ही बारिश में घाट की ऐसी दुर्दशा नहीं होती। लोगों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर गुणवत्ता को ताक पर रखकर काम किया गया और जिम्मेदार अधिकारी भी सब कुछ देखकर मौन बने रहे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि 15 लाख रुपए की राशि आखिर खर्च कहां हुई? यदि निर्माण शुरू से ही मानकों के विपरीत था तो संबंधित अधिकारियों ने समय रहते रोक क्यों नहीं लगाई? क्या निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित था या फिर पूरे मामले को संरक्षण प्राप्त है?
ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच हो और यदि अनियमितता साबित होती है तो सरपंच, सचिव तथा संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरे निर्माण कार्य को मानकों के अनुरूप दोबारा कराया जाए, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग रुक सके और ग्रामीणों को सुरक्षित घाट मिल सके।अब सवाल जनता पूछ रही है—क्या यह 15 लाख का घाट है या सरकारी खजाने पर पड़ा एक और भ्रष्टाचार का घाट? पहली बारिश ने जो तस्वीर दिखाई है, क्या प्रशासन अब भी आंखें मूंदे रहेगा या दोषियों पर कार्रवाई करेगा?

