जमीन के झगड़ों से रिश्तों तक को मिली राहत
रतलाम | पुलिस दर्पण
भूमि संबंधी विवादों का त्वरित और शांतिपूर्ण निराकरण करने के उद्देश्य से शनिवार को पुलिस थाना नामली परिसर स्थित मंदिर प्रांगण में विशेष भूमि विवाद निवारण शिविर आयोजित किया गया। शिविर का निरीक्षण पुलिस अधीक्षक अमित कुमार एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश पंद्रो ने किया। जिलेभर में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने विवादित पक्षों को आमने-सामने बैठाकर समझाइश, संवाद और विधिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान का प्रयास किया।
शिविर में तहसीलदार आशीष उपाध्याय, जिला अभियोजन अधिकारी योगेश तिवारी, राजस्व अमला तथा पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। थाना प्रभारी अमित कोरी ने बताया कि थाना क्षेत्र से करीब 40 भूमि विवाद शिविर में पहुंचे, जिनमें से 30 मामलों को चिन्हित किया गया और 17 मामलों का मौके पर ही निराकरण कर दिया गया। शेष प्रकरणों में वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
शिविर में ग्राम सिखेड़ी निवासी संतोष पति छोगालाल (55 वर्ष) के पुत्र पंकज चुंडावत ने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी नपती में आई 5 बीघा 17 बिस्वा भूमि में से लगभग 2 बीघा पर रिश्तेदारों ने कब्जा कर रखा है। शिकायत के अनुसार बीमारी के चलते महिला ने अपनी कृषि भूमि का एक हिस्सा रेखाबाई जाट को बेच दिया था, लेकिन खरीदार को खेत तक पहुंचने का रास्ता नहीं दिया जा रहा है। मामले में थाना प्रभारी ने कब्जाधारियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।
इसी तरह स्टेशन रोड स्थित शिवशक्ति कॉलोनी, वार्ड क्रमांक-14 में सरकारी रास्ता अवरुद्ध किए जाने की शिकायत भी सामने आई। इस संबंध में नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को अवगत कराते हुए शीघ्र समाधान के निर्देश दिए गए।
शिविर का सबसे भावुक पल तब देखने को मिला, जब एसडीओपी किशोर पाटनवाला ने भूमि विवाद में उलझे एक बुजुर्ग मां और बेटे को समझाइश देकर दोनों के बीच समझौता करा दिया। वर्षों पुराने विवाद का अंत होते ही मां-बेटे ने एक-दूसरे को अपनाया और बेटे की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उपस्थित लोगों ने इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए तालियां बजाकर दोनों का उत्साहवर्धन किया।
समाचार लिखे जाने तक शिविर में भूमि संबंधी विवाद लगातार पहुंच रहे थे और पुलिस-राजस्व विभाग की संयुक्त टीम उनके निराकरण में जुटी रही। लोगों ने इस पहल को प्रभावी बताते हुए ऐसे शिविर नियमित रूप से आयोजित करने की मांग की।

