40 ग्राहकों की एफडी पर डाका, 85 लाख का खेल उजागर

बैंक में बैठा ‘भेड़िया’! पूर्व शाखा प्रबंधक समेत 7 गिरफ्तार।

मोबाइल बैंकिंग का कथित दुरुपयोग कर ग्राहकों की एफडी तोड़ी गई, पुलिस जांच में रिश्तेदारों के खातों तक पहुंची रकम; बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल।

रतलामपुलिस दर्पण

शहर के लक्कड़पीठा स्थित यूको बैंक शाखा में सामने आए कथित एफडी घोटाले ने बैंकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच के अनुसार, बैंक के एक आउटसोर्स कर्मचारी ने ग्राहकों की गोपनीय बैंकिंग जानकारी का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) बिना अनुमति तोड़ी और करीब 85 लाख रुपये से अधिक की राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी। मामले की जांच में तत्कालीन शाखा प्रबंधक की भूमिका भी सामने आने के बाद पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

एक शिकायत से खुली करोड़ों के भरोसे पर चोट।

पुलिस के अनुसार पूरे मामले का खुलासा 30 जून 2026 को दर्ज एक शिकायत से हुआ। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बैंक में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी ने उनके खाते और एफडी से जुड़ी जानकारी का उपयोग कर मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से जमा राशि निकाल ली। शुरुआती जांच में मामला छोटा लगा, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई, एक-एक कर अन्य पीड़ित भी सामने आने लगे।

40 ग्राहकों की एफडी बिना अनुमति तोड़ी गई।

जांच में अब तक 40 ऐसे ग्राहक सामने आए हैं, जिनकी एफडी कथित रूप से बिना अनुमति तोड़ी गई। इन एफडी की राशि 20 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक बताई जा रही है। पुलिस का अनुमान है कि कुल गबन 85 लाख रुपये से अधिक का है। जांच अभी जारी है, इसलिए प्रभावित ग्राहकों और राशि में बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।

ऐसे चलता था पूरा खेल।

पुलिस जांच के अनुसार आरोपी पहले ग्राहकों की बैंकिंग जानकारी हासिल करता था। इसके बाद मोबाइल बैंकिंग के जरिए एफडी तोड़कर रकम अपने खाते में ट्रांसफर करता और फिर उसे रिश्तेदारों व परिचितों के खातों में भेज देता। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ खाताधारकों को कथित रूप से कमीशन या लाभ देकर इस लेन-देन में शामिल किया गया।

शिकायतकर्ता को ऐसे हुआ शक।

शिकायतकर्ता दिनेश बंजारा ने पुलिस को बताया कि उन्होंने नया बैंक खाता खुलवाने के लिए 72,500 रुपये जमा किए थे। बैंक की रसीद मिलने के बाद जब वे पासबुक और एटीएम लेने पहुंचे तथा बाद में खाते से राशि निकालने का प्रयास किया, तो खाते में मात्र ढाई हजार रुपये पाए गए। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसने पूरे मामले का खुलासा कर दिया।

पूर्व शाखा प्रबंधक भी गिरफ्त में।

पुलिस ने इस मामले में आउटसोर्स कर्मचारी राहुल राठौर, बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक त्रिलोक झा सहित कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी राहुल राठौर को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि अन्य आरोपियों को न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य तथ्यों का भी खुलासा हो सकता है।

बैंकिंग व्यवस्था पर बड़ा सवाल।

इस घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि ग्राहकों की एफडी जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली जमा राशि भी आंतरिक स्तर पर सुरक्षित नहीं रह पाती, तो बैंकों की निगरानी और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था कितनी प्रभावी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों के बाद बैंकों को डिजिटल सुरक्षा, आंतरिक ऑडिट और कर्मचारियों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना होगा।

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