खुशियों की दास्तां: 860 ग्राम की गंभीर नवजात को मिला नया जीवन, 60 दिन बाद स्वस्थ होकर लौटी घर

रतलाम। पुलिस दर्पण

रतलाम। रतलाम के एमसीएच स्थित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में उपचाररत 860 ग्राम वजन की गंभीर नवजात बालिका ने जीवन की कठिन लड़ाई जीत ली। करीब 60 दिनों तक चले विशेषज्ञ उपचार के बाद बालिका पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट गई। यह सफलता एसएनसीयू की चिकित्सकीय टीम की विशेषज्ञता, आधुनिक उपचार पद्धति और मां की अथक देखभाल का प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।

सागरपाड़ा, आलोट निवासी दीपिका का प्रसव गर्भावस्था के मात्र 25 सप्ताह में घर पर ही हो गया था। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को 108 एंबुलेंस से एमसीएच स्थित एसएनसीयू लाया गया। भर्ती के समय नवजात की स्थिति अत्यंत गंभीर थी। उसका वजन केवल 860 ग्राम था तथा उसे सांस लेने में गंभीर कठिनाई, शॉक और अत्यधिक कम वजन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।

सिविल सर्जन डॉ. ए.पी. सिंह के मार्गदर्शन तथा प्रभारी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक आर्या के नेतृत्व में एसएनसीयू की टीम ने फैसिलिटी बेस्ड नियोनेटल केयर गाइडलाइन के अनुसार तत्काल उपचार शुरू किया। समयपूर्व जन्म के कारण फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होने से नवजात को 15 दिनों तक सीपैप (CPAP) मशीन से ऑक्सीजन सहायता दी गई। बाद में नेजल प्रॉन्स और ऑक्सीजन हुड के माध्यम से उपचार जारी रखा गया।

उपचार के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब बालिका का वजन घटकर मात्र 690 ग्राम रह गया। उसे कई बार सांस रुकने (एपनिया) की समस्या हुई तथा प्रीमैच्योरिटी एनीमिया होने पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी करना पड़ा। चिकित्सकों की सतत निगरानी और समय पर उपचार से उसकी स्थिति धीरे-धीरे सुधरने लगी।

करीब 15 दिन बाद नवजात को नली के माध्यम से मां का दूध देना शुरू किया गया, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाया गया। साथ ही मां को कंगारू मदर केयर (केएमसी) और नवजात की विशेष देखभाल का प्रशिक्षण दिया गया। नियमित केएमसी और मां के दूध से बालिका का वजन लगातार बढ़ता गया।

लगभग 60 दिनों तक चले उपचार के बाद नवजात पूरी तरह स्वस्थ हो गई। 28 जुलाई 2026 को उसे अस्पताल से छुट्टी दी गई। डिस्चार्ज के समय उसका वजन बढ़कर लगभग 1400 ग्राम हो चुका था और वह स्वयं दूध पीने तथा सामान्य देखभाल के लिए सक्षम थी।

बालिका के परिजनों ने सिविल सर्जन डॉ. ए.पी. सिंह, प्रभारी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक आर्या, डॉ. राम कुमार सहित एसएनसीयू के सभी डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों एवं सहयोगी कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उपचार में नर्सिंग ऑफिसर इंचार्ज भारती गहलोत तथा नर्सिंग अधिकारियों अश्विथि, निशा, लाली, प्रीति, उमा, दीक्षा, राधा, निर्मला और गुड्डी सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह सफलता न केवल एसएनसीयू रतलाम की उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि समय पर विशेषज्ञ उपचार, मां का समर्पण और प्रशिक्षित चिकित्सा टीम के संयुक्त प्रयास से अत्यंत गंभीर नवजातों को भी नया जीवन दिया जा सकता है।

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