30 से अधिक फर्जी फर्मों के जरिए 5.50 करोड़ से ज्यादा के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा, भोपाल से दो मास्टरमाइंड गिरफ्तार
सागर। पुलिस दर्पण
सागर। मध्यप्रदेश में फर्जी फर्मों और बैंक खातों के जरिए ऑनलाइन सट्टे की रकम का लेनदेन करने वाले अंतरराज्यीय संगठित गिरोह का सागर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस की जांच में अब तक 30 से अधिक फर्जी फर्मों और बड़ी संख्या में बैंक खातों का पता चला है। इन खातों में ऑनलाइन सट्टे से जुड़ी रकम का लेनदेन किया जाता था। प्रारंभिक वित्तीय जांच में 5.50 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं।
सागर पुलिस ने मामले के दो मुख्य आरोपियों अमित विश्वकर्मा और ऋषभ पटेल (27), निवासी भोपाल को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के ठिकाने से 2.69 करोड़ रुपए नकद, करीब 30 लाख रुपए का सोना, नोट गिनने की मशीन तथा फर्जी फर्मों और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं। दोनों आरोपियों को पुलिस ने 8 दिन की रिमांड पर लिया है।
बेरोजगार युवाओं को कमीशन का लालच देकर खुलवाते थे खाते
पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य बेरोजगार युवाओं और जरूरतमंद लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते और फर्में खोली जाती थीं। इसके बाद इन्हीं खातों के माध्यम से ऑनलाइन सट्टे से प्राप्त रकम का लेनदेन किया जाता था।
जांच में ग्लैमर इंटरप्राइजेस, भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस, समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स सहित 30 से अधिक संदिग्ध फर्मों का पता चला है। इन फर्मों के नाम से विभिन्न निजी बैंकों में करंट अकाउंट खोले गए थे।
2019 से चल रहा था ऑनलाइन बेटिंग का कारोबार
पूछताछ में मुख्य आरोपी ऋषभ पटेल ने कथित तौर पर बताया कि उसने वर्ष 2019 से ऑनलाइन बेटिंग का कारोबार शुरू किया था। उसका लक्ष्य बड़ा मैच फिक्सर और बुकी बनना था। पुलिस के मुताबिक आरोपी वेबसाइट और टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से ग्राहकों की चेन तैयार कर ऑनलाइन सट्टा संचालित करता था।
एक कॉल ने खोल दिया पूरा राज
मामले की जांच एएसपी नरेंद्र सोलंकी के नेतृत्व में की जा रही थी। पुलिस लगातार आरोपियों की गतिविधियों और मोबाइल नंबरों को ट्रैक कर रही थी। आरोपी अपने मुख्य मोबाइल नंबर से किसी से बातचीत नहीं करता था और दूसरे नंबरों के जरिए वॉट्सऐप कॉल करता था।
इसी दौरान आरोपी ने कथित तौर पर एक बार गलती से अपने मुख्य नंबर से कॉल कर दिया। पुलिस ने इसी कॉल के आधार पर उसकी लोकेशन ट्रैक की और भोपाल पुलिस को सूचना दी। संयुक्त कार्रवाई में आरोपियों को भोपाल के पास सीहोर से दबोच लिया गया।
पुलिस के अनुसार आरोपियों द्वारा इस्तेमाल की जा रही कई सिमों में फर्जी जानकारी दर्ज थी। जिस मकान से बड़ी मात्रा में नकदी और सोना बरामद हुआ, वह भी किराए का ठिकाना बताया गया है।
पार्सल के जरिए चलता था पूरा नेटवर्क
गिरोह के सदस्य सीधे संपर्क और मुलाकात से बचते थे। सागर में म्यूल बैंक खाते खुलवाने के बाद खातों से जुड़े दस्तावेज और अन्य जानकारी चार्टर्ड बस के जरिए भोपाल भेजी जाती थी। वहां ऋषभ और विपिन इन दस्तावेजों को रिसीव करते थे।
पुलिस का कहना है कि गिरोह बेहद सावधानी से काम करता था और जरूरत पड़ने पर ही मुख्य सदस्य आपस में मिलते थे।
छह आरोपी गिरफ्तार, दो की तलाश जारी
अब तक पुलिस ने धर्मेन्द्र नाहर, सोनू दांगी, अमित विश्वकर्मा, विपिन गिरी, स्वर्णेन्द्र पांडे और ऋषभ पटेल को गिरफ्तार किया है। अमित विश्वकर्मा और ऋषभ पटेल पुलिस रिमांड पर हैं। वहीं सरमन उर्फ शुभम रैकवार और ऋषि केशव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी अमित विश्वकर्मा का जीजा पुलिस विभाग में कार्यरत है। शुरुआती जांच के दौरान आरोपियों के श्रीलंका या म्यांमार भाग जाने की आशंका भी जताई गई थी, लेकिन पुलिस ने तकनीकी निगरानी के जरिए उनकी लोकेशन तक पहुंचकर गिरफ्तारी कर ली।
सागर एसपी अनुराग सुजानिया ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि फर्जी फर्मों, बैंक खातों और ऑनलाइन सट्टे के इस नेटवर्क की जांच लगातार जारी है। पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर संदिग्ध लेनदेन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

