ग्वालियर। पुलिस दर्पण
ग्वालियर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ परिसर में गुरुवार को एक ऐसी मानवीय और प्रेरणादायी पहल की शुरुआत हुई, जिसने न्याय को केवल विवाद के समाधान तक सीमित न रखते हुए सम्मानजनक पुनर्वास और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की नई मिसाल पेश की। यहां मूक-बधिर दंपति के लिए ‘इशारा कैफे’ शुरू किया गया है, जिसका संचालन दंपति स्वयं करेंगे।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने गुरुवार को ‘इशारा कैफे’ का उद्घाटन किया। इस पहल के जरिए मूक-बधिर दंपति पूजा और दीपक गुप्ता को रोजगार का अवसर मिला है, जिससे वे सम्मान और आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकेंगे।
8 साल पुराने वैवाहिक विवाद का हुआ समाधान
पूजा और दीपक गुप्ता का वैवाहिक विवाद करीब 8 वर्षों से न्यायालय में लंबित था। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर मामले को मीडियेशन के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया गया।
इस मामले की खास बात यह रही कि दंपति की मीडियेशन प्रक्रिया में प्रशिक्षित मूक-बधिर मध्यस्थों और सांकेतिक भाषा में दक्ष मध्यस्थों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संवाद की बाधाओं को दूर कर दोनों पक्षों के बीच समझ और विश्वास का वातावरण तैयार किया गया।
मीडियेशन के सफल परिणामस्वरूप दंपति ने पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर दोबारा साथ रहने का निर्णय लिया।
विवाद समाधान के साथ पुनर्वास पर भी जोर
मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने मामले के समाधान के बाद भी अपनी भूमिका समाप्त नहीं की। दंपति को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल की गई।
इसी उद्देश्य से उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर परिसर में ‘इशारा कैफे’ स्थापित किया गया। कैफे का संचालन दंपति द्वारा किया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता का आधार मिलेगा।
‘न्याय केवल विवाद का समाधान नहीं’
‘इशारा कैफे’ इस विचार का उदाहरण है कि न्याय केवल विवाद खत्म करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति को सम्मान के साथ दोबारा खड़ा करने की प्रक्रिया भी है। यह पहल मूक-बधिर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने, रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद
उद्घाटन अवसर पर प्रशासनिक न्यायाधिपति न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया, न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला, न्यायमूर्ति आशीष श्रोती, न्यायमूर्ति अमित सेठ, न्यायमूर्ति पवन द्विवेदी, न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत और न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता सहित न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में प्रधान जिला न्यायाधीश ललित किशोर, प्रधान जिला न्यायाधीश (सतर्कता) जाकिर हुसैन, प्रिंसिपल रजिस्ट्रार राजीव के. पाल, ओएसडी/रजिस्ट्रार ऋतुराज सिंह चौहान, कलेक्टर रुचिका चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, जिला न्यायालय के न्यायाधीश, उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष पवन पाठक एवं सचिव महेश गोयल सहित अतिरिक्त महाधिवक्ता, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल, वरिष्ठ अधिवक्ता, न्यायिक एवं पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

