ईमानदारी और जनसेवा से ही बनती है अधिकारी की पहचान: डीजीपी

37 परिवीक्षाधीन डिप्टी कलेक्टरों को प्रशासनिक मूल्यों, सुशासन और जनसेवा का दिया मंत्र।

भोपाल | पुलिस दर्पण

भोपाल । मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेरणादायी कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री कैलाश मकवाणा ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग से चयनित 37 परिवीक्षाधीन डिप्टी कलेक्टरों का मार्गदर्शन करते हुए प्रशासनिक सेवा के मूल्यों, ईमानदारी और जनसेवा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

डीजीपी श्री मकवाणा ने कहा कि राजस्व और पुलिस प्रशासन सुशासन की दो मजबूत धुरी हैं, जिनके समन्वय और पारदर्शी कार्यशैली से आम नागरिकों का शासन व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने अधिकारियों से प्रशिक्षण अवधि का अधिकतम लाभ उठाने, कानूनों का गहन अध्ययन करने और अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करने का आह्वान किया।
उन्होंने नव चयनित अधिकारियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा तथा राज्यव्यापी अभियान “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि बदलते समय में कानूनों की गहरी समझ और तकनीकी दक्षता अत्यंत आवश्यक है।
अपने सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए डीजीपी श्री मकवाणा ने कहा कि जनता का विश्वास केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि निष्पक्ष निर्णय, त्वरित कार्रवाई, संवेदनशील व्यवहार और निरंतर जनसेवा से अर्जित होता है। उन्होंने अधिकारियों को टीम भावना, ईमानदारी, विश्वसनीयता और अधीनस्थ कर्मचारियों के कार्य का सम्मान करने की सीख भी दी। कार्यक्रम के अंत में सभी 37 परिवीक्षाधीन डिप्टी कलेक्टरों को उनके उज्ज्वल प्रशासनिक भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया गया कि वे अपनी कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जनसेवा के संकल्प के साथ मध्यप्रदेश में सुशासन को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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