बैतूल पुलिस कंट्रोल रूम में ICJS, ई-साक्ष्य और ई-समंस का ऑनलाइन प्रशिक्षण, स्मार्ट पुलिसिंग पर जोर

देवीनाथ लोखंडे सह संपादक दक्षिण मध्यप्रदेश

बैतूल। आपराधिक न्याय प्रणाली को तकनीक आधारित और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शनिवार को पुलिस कंट्रोल रूम बैतूल में ICJS, ई-साक्ष्य, ई-समंस एवं न्याय-श्रुति से संबंधित ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम मध्यप्रदेश स्टेट ज्यूडिशियल अकादमी, जबलपुर द्वारा आयोजित किया गया था।

कार्यशाला का शुभारंभ जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री दिनेश चंद्र थपलियाल ने पुलिस अधीक्षक बैतूल श्री वीरेन्द्र जैन की उपस्थिति में किया। इस दौरान न्यायाधीश श्री सचिन कुमार घोष, श्री सुरेश यादव, श्री लक्ष्मण डोडवे सहित न्यायालय के अन्य न्यायाधीशगण तथा बैतूल, मुलताई, आमला एवं भैंसदेही की जिला अभियोजन शाखा के एडीपीओ उपस्थित रहे।

कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कमलेश कुमार खरपुसे, एसडीओपी बैतूल सुश्री अन्नपूर्णा सिरसाम, डीएसपी महिला सेल श्री दुर्गेश आर्मों सहित जिले के विभिन्न थानों के निरीक्षक, उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक एवं अन्य पुलिस अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।

चार महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान ICJS (Inter-Operable Criminal Justice System), e-Sakshya, e-Summons एवं Nyaya Shruti की कार्यप्रणाली, उपयोगिता और आपराधिक न्याय प्रणाली में इनके महत्व को विस्तार से समझाया गया।

ICJS के माध्यम से पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, जेल और फोरेंसिक जैसी आपराधिक न्याय प्रणाली की प्रमुख इकाइयों को डिजिटल रूप से जोड़ा जाता है। इससे संबंधित विभागों के बीच डेटा का सुरक्षित और सहज आदान-प्रदान संभव होता है तथा विवेचना में तेजी, डेटा की गुणवत्ता में सुधार और कागजी कार्यवाही में कमी लाने में मदद मिलती है।

वहीं ई-साक्ष्य के माध्यम से घटनास्थल पर साक्ष्य संकलन, तलाशी एवं जब्ती जैसी प्रक्रियाओं का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार करने की जानकारी दी गई। इससे डिजिटल साक्ष्यों के संग्रहण, संरक्षण और न्यायालय में इलेक्ट्रॉनिक प्रस्तुति की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है।

ई-समंस के जरिए न्यायालयीन समंस को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जारी एवं तामील करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इससे समंस की कार्रवाई में तेजी और पारदर्शिता लाने तथा न्यायालयीन प्रक्रिया में होने वाले अनावश्यक विलंब को कम करने में सहायता मिलेगी।

इसी तरह न्याय-श्रुति वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित सुविधा है, जिसके माध्यम से अभियुक्त, गवाह, पुलिस अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, वैज्ञानिक विशेषज्ञ एवं जेल में निरुद्ध व्यक्तियों की न्यायालयीन कार्यवाही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थिति और साक्ष्य संबंधी कार्यवाही संभव होती है।

वैज्ञानिक विवेचना और समयबद्ध न्याय पर जोर

पुलिस अधीक्षक श्री वीरेन्द्र जैन ने प्रशिक्षण को पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकी प्रणालियों का प्रभावी उपयोग त्वरित एवं वैज्ञानिक विवेचना, डिजिटल साक्ष्यों के बेहतर संधारण और समयबद्ध न्याय प्रक्रिया के लिए आवश्यक है।

उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का व्यवहारिक रूप से उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ICJS और इससे जुड़े डिजिटल एप्लीकेशन्स के बेहतर उपयोग से पुलिस, अभियोजन एवं न्यायालय के बीच समन्वय और मजबूत होगा तथा तकनीक आधारित स्मार्ट पुलिसिंग को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यशाला के माध्यम से पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को बदलती आपराधिक न्याय व्यवस्था के अनुरूप डिजिटल तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित किया गया।

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