दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के गंभीर मामले में विशेष अदालत ने सुनाया फैसला संदेह से परे आरोप सिद्ध नहीं होने पर आरोपी भूरे खां दोषमुक्त

सह संपादक बैतूल देवीनाथ लोखंडे

बैतूल। दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के गंभीर आरोपों से जुड़े एक प्रकरण में बैतूल की अनन्य विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने साक्ष्यों के अभाव, पीड़िता के न्यायालयीन बयान तथा अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में पाए गए विरोधाभासों के आधार पर 40 वर्षीय भूरे खां को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। अनन्य विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) श्रीमती सोमप्रभा चौहान ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल नहीं हो सका।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजय चौरसे ने बताया कि अभियोजन के अनुसार 12 जून 2022 को आरोपी भूरे खां ने पीड़िता के घर में प्रवेश कर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया तथा जान से मारने की धमकी दी थी। इस आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 450, 294, 506 और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान मामला उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंचा, जब पीड़िता ने न्यायालय में अपने पूर्व बयानों से अलग बयान दिया। उसने अदालत को बताया कि उसका और आरोपी का पहले से प्रेम संबंध था तथा दोनों के बीच बने शारीरिक संबंध आपसी सहमति से थे। पीड़िता ने यह भी कहा कि आरोपी ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया और उसने पहले पुलिस के दबाव में अलग बयान दिए थे।

सुनवाई के दौरान पीड़िता की आयु भी विवाद का महत्वपूर्ण बिंदु रही। अभियोजन ने स्कूल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर उसकी जन्मतिथि 6 अप्रैल 2005 बताते हुए घटना के समय उसे नाबालिग बताया, जबकि न्यायालय में पीड़िता ने अपनी वास्तविक जन्मतिथि 5 मार्च 2003 बताते हुए कहा कि घटना के समय उसकी उम्र 19 वर्ष थी।

न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत एफएसएल रिपोर्ट में आरोपी के विरुद्ध कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं मिले। वहीं मेडिकल परीक्षण में भी किसी प्रकार की चोट अथवा जबरदस्ती के संकेत नहीं पाए गए। इन तथ्यों को भी न्यायालय ने अपने निर्णय में महत्वपूर्ण माना।

अधिवक्ता संजय चौरसे ने बताया कि न्यायालय ने समस्त मौखिक, दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष अपना मामला संदेह से परे सिद्ध नहीं कर पाया। साथ ही पीड़िता की आयु 18 वर्ष से कम होना भी प्रमाणित नहीं हो सका। इन परिस्थितियों में पॉक्सो एक्ट की धाराएं लागू नहीं ठहराईं गईं और भूरे खां को भारतीय दंड संहिता तथा पॉक्सो एक्ट के सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।

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