भुगतान-बिलों में प्रथमदृष्टया अनियमितता मिलने पर कोमलसिंह पंवार निलंबित, सरपंच-उपसरपंच को धारा 40 का नोटिस; अब पंचायत के पुराने कामकाज की भी जांच की उठी मांग
रतलाम | पुलिस दर्पण
रतलाम। ग्राम पंचायतों में शासकीय राशि के उपयोग और विकास कार्यों में पारदर्शिता को लेकर प्रशासन की सख्ती के बीच भदवासा ग्राम पंचायत से जुड़ा मामला सामने आया है। जिला पंचायत की ओर से की गई जांच में पंचायत के विभिन्न भुगतान एवं बिलों से संबंधित अनियमितताएं प्रथमदृष्टया पाए जाने के बाद ग्राम पंचायत भदवासा के सचिव कोमलसिंह पंवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं मामले में पंचायत की सरपंच अनीता मकवाना एवं उपसरपंच रमेश मालवीय को मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 के अंतर्गत कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब भदवासा ग्राम पंचायत के कामकाज को लेकर गांव में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। खासकर पंचायत में पिछले कुछ वर्षों में हुए भुगतान, निर्माण कार्य, सामग्री खरीदी, योजनाओं के क्रियान्वयन और शासकीय राशि के उपयोग से जुड़े रिकॉर्ड की विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।
जांच में भुगतान और बिलों में सामने आई अनियमितताएं
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत भदवासा को लेकर शिकायतें जिला प्रशासन तक पहुंची थीं। शिकायतों के आधार पर पंचायत के विभिन्न कार्यों और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई। जांच के दौरान कुछ भुगतान एवं बिलों से जुड़ी अनियमितताएं प्रथमदृष्टया सामने आने के बाद पंचायत सचिव से जवाब मांगा गया। सचिव कोमलसिंह पंवार द्वारा प्रस्तुत जवाब का परीक्षण करने के बाद जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन ने जवाब को समाधानकारक नहीं माना। इसके बाद सचिव के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई अपने आप में इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर होने वाले भुगतान और शासकीय राशि के उपयोग को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी और कार्रवाई की बात कह रहा है।
सरपंच और उपसरपंच को भी देना होगा जवाब
अब उठी पुराने कार्यकाल की फाइलें खंगालने की मांग
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर ग्राम पंचायत की सरपंच अनीता मकवाना एवं उपसरपंच रमेश मालवीय को मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 के तहत कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। दोनों से निर्धारित समयावधि में अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है। अब उनके जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कार्रवाई क्या होती है, इस पर ग्रामीणों और पंचायत से जुड़े लोगों की नजर बनी हुई है। महत्वपूर्ण यह है कि कारण बताओ नोटिस जारी होना स्वयं में दोष सिद्ध होना नहीं है। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अधिकार है और अंतिम जिम्मेदारी अथवा दोष का निर्धारण सक्षम अधिकारी की जांच एवं आदेश के बाद ही होगा।
वर्तमान कार्रवाई के बाद भदवासा पंचायत के पिछले वर्षों के कामकाज को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि यदि पंचायत के पिछले कई वर्षों के भुगतान, निर्माण कार्यों, सामग्री खरीदी, मजदूरी भुगतान, पंचायत निधि, विभिन्न योजनाओं के तहत हुए कार्य और उनके भौतिक सत्यापन की निष्पक्ष जांच की जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल वर्तमान प्रकरण तक जांच सीमित न रखकर पंचायत के पुराने रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लिया जाना चाहिए।
हालांकि, इन चर्चाओं और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पुराने कार्यकाल में किसी व्यक्ति द्वारा वित्तीय अनियमितता किए जाने का निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले निकालना उचित नहीं होगा।
उपसरपंच की भूमिका को लेकर ग्रामीणों में चर्चा
ग्रामीण स्तर पर यह भी चर्चा है कि लंबे समय से पंचायत के कामकाज में उपसरपंच रमेश मालवीय की सक्रिय भूमिका रही है। कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि महिला सरपंच होने के कारण पंचायत के रोजमर्रा के कामकाज में उपसरपंच का प्रभाव अधिक रहा है।
कुछ ग्रामीणों की यह भी मांग है कि यदि पंचायत के कामकाज में किसी व्यक्ति का प्रभाव रहा है तो उस अवधि के सभी प्रशासनिक और वित्तीय निर्णयों की दस्तावेजों के आधार पर जांच की जानी चाहिए।
दबी जुबान में ग्रामीण यह सवाल भी उठा रहे हैं कि यदि पिछले वर्षों के रिकॉर्ड—जैसे पंचायत प्रस्ताव, भुगतान वाउचर, बिल, मस्टर रोल, सामग्री खरीदी, निर्माण कार्यों के माप पुस्तिका रिकॉर्ड और बैंक लेन-देन—की जांच की जाए तो पंचायत के कामकाज की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। यह ग्रामीणों की मांग और आरोप हैं, जिनकी पुष्टि स्वतंत्र जांच के बाद ही हो सकेगी।
मनरेगा और पंचायत के विकास कार्यों का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आए
उपलब्ध सरकारी मनरेगा रिकॉर्ड में भदवासा ग्राम पंचायत के नाम से विभिन्न विकास कार्य दर्ज हैं। उदाहरण के तौर पर 2026-27 की सूची में पंचायत भवन एवं माध्यमिक विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण तथा भदवासा-सिखेड़ी मार्ग पर वृक्षारोपण जैसे कार्य दर्ज हैं। ऐसे में यदि प्रशासन व्यापक जांच करता है तो केवल कागजी भुगतान ही नहीं, बल्कि जमीन पर हुए वास्तविक कार्य और रिकॉर्ड में दर्शाए गए कार्यों का मिलान भी महत्वपूर्ण होगा।
जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि—
स्वीकृत राशि कितनी थी?
वास्तविक कार्य कितना हुआ?
भुगतान किसके नाम और किस मद में किया गया?
सामग्री की खरीदी कहां से हुई?
बिल और वाउचर वास्तविक हैं या नहीं?
मस्टर रोल में दर्ज मजदूरों ने वास्तव में काम किया या नहीं?
निर्माण कार्य की गुणवत्ता कैसी रही?
पंचायत के बैंक खाते से भुगतान किस प्रक्रिया के तहत हुआ?
ग्रामसभा और पंचायत बैठकों में कार्यों को लेकर क्या निर्णय लिए गए?
मौके पर कार्य की स्थिति रिकॉर्ड से मेल खाती है या नहीं?
इन बिंदुओं की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकता है कि अनियमितताएं केवल प्रक्रिया संबंधी थीं या उनके पीछे वित्तीय नुकसान अथवा अन्य गंभीर मामला भी है।
सवाल सिर्फ सचिव के निलंबन तक सीमित नहीं
सचिव का निलंबन कार्रवाई का पहला बड़ा पड़ाव है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच पंचायत के पूरे वित्तीय और प्रशासनिक कार्यकाल तक पहुंचेगी? ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी पंचायत में वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो केवल उस अवधि के एक अधिकारी या कर्मचारी की जांच पर्याप्त नहीं होनी चाहिए। जिस अवधि में संबंधित कार्य हुए, उस दौरान लिए गए सभी निर्णयों, प्रस्तावों और भुगतानों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। इस कारण ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर है कि कारण बताओ नोटिस के बाद सरपंच और उपसरपंच का पक्ष क्या सामने आता है तथा जिला पंचायत प्रशासन आगे किस स्तर तक जांच को ले जाता है।
सरकारी रिकॉर्ड और जमीन पर हुए काम का हो भौतिक सत्यापन
ग्रामीणों की सबसे बड़ी अपेक्षा यह है कि पंचायत में हुए विकास कार्यों की मौके पर जांच कराई जाए। कागजों पर कार्य पूर्ण होना और जमीन पर कार्य की वास्तविक स्थिति अलग-अलग होने की स्थिति में ही वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। इसके लिए पुराने कार्यों की सूची तैयार कर प्रत्येक कार्य का भौतिक सत्यापन, स्वीकृति आदेश से लेकर भुगतान तक की फाइल की जांच तथा संबंधित हितग्राहियों और ग्रामीणों के बयान लिए जाना महत्वपूर्ण होगा।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश—अनियमितता मिली तो कार्रवाई तय
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पंचायत स्तर पर वित्तीय अनियमितता, शासकीय राशि के दुरुपयोग अथवा नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। नियमों के उल्लंघन के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
इससे पहले भी रतलाम जिले में पंचायत स्तर पर कार्रवाई के उदाहरण सामने आ चुके हैं। मार्च 2026 में कनेरी ग्राम पंचायत के सचिव को लोकायुक्त कार्रवाई के बाद जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन द्वारा निलंबित किए जाने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। भदवासा प्रकरण में भी अब प्रशासन की कार्रवाई ने पंचायतों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर संदेश दिया है।
अब ग्रामीणों की नजर जांच के अगले चरण पर
भदवासा ग्राम पंचायत में सचिव के निलंबन के बाद मामला यहीं थमता दिखाई नहीं दे रहा है। सरपंच और उपसरपंच को जारी कारण बताओ नोटिस, सचिव के जवाब को असंतोषजनक माना जाना और भुगतान-बिलों में प्रथमदृष्टया अनियमितताओं का सामने आना—इन सभी घटनाक्रमों ने पंचायत के कामकाज को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब ग्रामीणों की मांग है कि वर्तमान प्रकरण के साथ-साथ पिछले वर्षों के पंचायत कार्यकाल की भी निष्पक्ष, दस्तावेज आधारित और भौतिक सत्यापन वाली जांच कराई जाए। यदि ऐसी जांच होती है तो पंचायत के पुराने भुगतान, निर्माण कार्य, योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय लेन-देन की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। वहीं यदि किसी व्यक्ति पर लगाए जा रहे आरोप जांच में गलत पाए जाते हैं तो उसे भी स्पष्ट रूप से सामने लाया जाना चाहिए। भदवासा पंचायत में सचिव पर हुई कार्रवाई ने एक सवाल जरूर छोड़ दिया है—क्या जांच की फाइल केवल वर्तमान मामले तक सीमित रहेगी, या पंचायत के पिछले वर्षों के कामकाज की परत-दर-परत पड़ताल भी होगी? अब इसका जवाब जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई से मिलेगा।

